Rudraprayag: केदारनाथ धाम की वार्षिक यात्रा 2026 का शुभारंभ विधिवत रूप से हो गया है। रविवार को ओंकारेश्वर मंदिर से भगवान केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव डोली पारंपरिक रीति-रिवाजों और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धाम के लिए रवाना हुई। डोली प्रस्थान के दौरान पूरा क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा। मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया था, जिससे माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
पारंपरिक कार्यक्रम के अनुसार डोली ऊखीमठ से निकलकर गुप्तकाशी पहुंचेगी, जहां विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी में श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलेगा। इसके बाद डोली फाटा और फिर गौरीकुंड होते हुए 21 अप्रैल को केदारनाथ धाम पहुंचेगी। 22 अप्रैल की सुबह शुभ मुहूर्त में मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे, जिसके साथ यात्रा औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी।
प्रशासन की ओर से यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। जिलाधिकारी और बदरी-केदार मंदिर समिति के अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल, बिजली आपूर्ति और मार्गों के सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। बर्फ हटाने सहित सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं।
वहीं, उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की शुरुआत भी अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर हो गई। गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट रविवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गंगोत्री धाम पहुंचे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से पहली पूजा अर्पित की।
धार्मिक परंपराओं के तहत मां गंगा और मां यमुना की डोलियां अपने-अपने शीतकालीन स्थलों से यात्रा कर धाम पहुंचीं। विधि-विधान के साथ कपाट खुलने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर चारधाम यात्रा की सफलता और देश-प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और यादगार यात्रा अनुभव देने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने ‘ग्रीन और क्लीन चारधाम यात्रा’ के लिए सभी से सहयोग करने की अपील की।
पूरे उत्तराखंड में इस समय आस्था, उत्साह और भक्ति का वातावरण बना हुआ है, और इस वर्ष लाखों श्रद्धालुओं के चारधाम यात्रा में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।


