Jharkhand News: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी), झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्रों के आंदोलन ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया। राज्य सरकार ने आंदोलनरत छात्रों से बातचीत की पहल करते हुए मुख्यमंत्री से मुलाकात का प्रस्ताव दिया, लेकिन छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास जाकर वार्ता करने से इनकार कर दिया।
बुधवार को अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) और अपर जिलाधिकारी (लॉ एंड ऑर्डर) धरनास्थल पहुंचे। उन्होंने छात्र प्रतिनिधियों को मुख्यमंत्री की ओर से वार्ता का निमंत्रण सौंपा। प्रशासन ने बताया कि शाम चार बजे मुख्यमंत्री आवास पर पांच छात्र प्रतिनिधियों के साथ बैठक प्रस्तावित की गई है, ताकि आंदोलनकारियों की मांगों पर चर्चा कर समाधान का रास्ता निकाला जा सके।
हालांकि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्रों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि यह किसी पांच प्रतिनिधियों का व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों प्रतियोगी छात्रों के भविष्य से जुड़ा जनआंदोलन है। ऐसे में मुख्यमंत्री को स्वयं धरनास्थल पर आकर सभी छात्रों के बीच खुली और पारदर्शी बातचीत करनी चाहिए।
छात्रों का कहना है कि सरकार केवल वार्ता का निमंत्रण देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर सकती। उनका आरोप है कि 14वीं जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल, टीडीपीएल सहित कई भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। इसलिए सरकार को इन मामलों की निष्पक्ष जांच, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और दोषियों पर कार्रवाई का स्पष्ट भरोसा देना होगा।
आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक अनिश्चितकालीन धरना, सत्याग्रह और आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल कुछ अभ्यर्थियों की नहीं, बल्कि राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य और रोजगार से जुड़ी है।
छात्रों ने यह भी कहा कि यदि सरकार वास्तव में संवाद के माध्यम से समाधान चाहती है, तो बंद कमरे में सीमित प्रतिनिधियों से बातचीत के बजाय सार्वजनिक रूप से धरनास्थल पर आकर अपना पक्ष रखे। उनका मानना है कि इससे सरकार की मंशा स्पष्ट होगी और आंदोलन में शामिल सभी छात्रों का भरोसा भी मजबूत होगा।
गौरतलब है कि भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, धांधली और अनियमितताओं के विरोध में अभ्यर्थी 29 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर बैठे हैं। वे परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पारदर्शी भर्ती प्रणाली लागू करने की मांग कर रहे हैं।
सोनम वांगचुक कर पहल पर देवेंद्रनाथ महतो ने समाप्त किया निर्जला अनशन
झारखंड में 14वीं जेपीएससी, जेएसएससी-सीजीएल, टीडीपीएल सहित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, धांधली और अनियमितताओं के विरोध में अभ्यर्थियों का आंदोलन बुधवार को भी जारी रहा। परीक्षाओं को रद्द कर पारदर्शी, निष्पक्ष और भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती प्रणाली लागू करने की मांग को लेकर 29 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा अनिश्चितकालीन सत्याग्रह लगातार जारी है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
आंदोलन के दौरान छात्रों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम परिसर में छात्र दो समूहों में आंदोलनरत रहे। एक ओर झारखंड लोकक्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्रनाथ महतो और उनके साथी महेंद्र प्रसाद आमरण अनशन पर बैठे रहे, जबकि दूसरी ओर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने धरना-प्रदर्शन के माध्यम से अपना विरोध दर्ज कराया।
इसी दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के माध्यम से देवेंद्रनाथ महतो से बातचीत की। स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताते हुए उन्होंने महतो से पानी पीने का आग्रह किया। इसके बाद देवेंद्रनाथ महतो ने नींबू पानी ग्रहण कर निर्जला अनशन समाप्त किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आमरण अनशन और आंदोलन पहले की तरह जारी रहेगा तथा मांगें पूरी होने तक वह पीछे नहीं हटेंगे।


