Jharkhand News: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) से जुड़ी कथित नियुक्ति अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए जाने को भाजपा ने सकारात्मक कदम बताया है। झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह कदम छात्रों के संघर्ष और न्याय की मांग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
सोमवार को जारी बयान में आदित्य साहू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद छात्रों में न्याय की उम्मीद जगी है। उन्होंने कहा कि युवाओं के अधिकार और भविष्य से जुड़े मामले की लड़ाई अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच चुकी है। उनके अनुसार, यह सीबीआई जांच की दिशा में आगे बढ़ने वाला महत्वपूर्ण कदम है।
आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि जेपीएससी और जेएसएससी के माध्यम से कथित तौर पर नौकरी बेचने और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किए जाने की शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान सक्षम एजेंसी से जांच की आवश्यकता को लेकर अदालत की टिप्पणी भी महत्वपूर्ण है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य सरकार से सवाल किया कि वह सीबीआई जांच से क्यों बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कथित नियुक्ति घोटाले में शामिल लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है। साहू ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ने वाली प्रक्रिया से पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है और युवाओं को न्याय मिल सकता है।
उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर छात्र आंदोलनों से कठोर तरीके से निपटने का भी आरोप लगाया। साहू ने कहा कि आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई, कथित मारपीट और मुकदमों के जरिए छात्रों को परेशान किया गया। उन्होंने सोशल मीडिया समेत छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने का भी आरोप लगाया।
आदित्य साहू ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर भी छात्रहित के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में चल रही सीआईडी जांच से भाजपा संतुष्ट नहीं है और सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच होने पर ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी छात्रों के साथ खड़ी है और दोषियों को बेनकाब करने तथा युवाओं को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने दावा किया कि 2029 में भाजपा की सरकार बनने पर संबंधित मामलों की सीबीआई जांच की अनुशंसा और छात्रों पर दर्ज कथित झूठे मुकदमों को वापस लेने का फैसला पहली कैबिनेट में किया जाएगा।


