Jharkhand News: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा रद्द किए जाने के बाद अब इंटरव्यू प्रक्रिया को लेकर भी विवाद गहराने लगा है। इंटरव्यू में कथित गड़बड़ी और अभ्यर्थियों से पैसे लिए जाने के आरोपों को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले की जांच सीआईडी के बजाय केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है।
बाबूलाल मरांडी ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर कहा कि टीडीएल से जुड़े रामवीर सिंह और अभय तिवारी की ओर से जेपीएससी इंटरव्यू बोर्ड को ‘मैनेज’ करने की बात कहे जाने का दावा सामने आया है। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू में अभ्यर्थियों से पैसे लेने के मामले में तत्कालीन जेपीएससी सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम की गिरफ्तारी भी हो चुकी है।
मरांडी के मुताबिक, रामवीर सिंह ने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर बताया है कि कोड डिकोड कर अभ्यर्थियों को तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष और सदस्यों के बोर्ड के सामने इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता था। उन्होंने कहा कि यदि पूछताछ में सामने आए ये दावे सही हैं तो मामला बेहद गंभीर है और इंटरव्यू प्रक्रिया से जुड़े हर पहलू की गहन जांच जरूरी है।
नेता प्रतिपक्ष ने इंटरव्यू बोर्ड में शामिल अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक समेत कई आईपीएस अधिकारी जेपीएससी के इंटरव्यू बोर्ड में शामिल रहे हैं। ऐसे में यदि बोर्ड में शामिल अधिकारियों की भूमिका को लेकर ही सवाल उठ रहे हैं तो उसी जांच एजेंसी द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच किए जाने पर सवाल खड़ा होना स्वाभाविक है।
मरांडी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए, ताकि किसी भी तरह के संदेह की गुंजाइश न रहे। उन्होंने कहा कि यदि इंटरव्यू में गड़बड़ी या उसे ‘मैनेज’ करने के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो इंटरव्यू बोर्ड में शामिल सभी अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाने चाहिए और उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जेपीएससी जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था की परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों का भरोसा बेहद जरूरी है। मामले की जांच पूरी गहराई और निष्पक्षता से होनी चाहिए तथा जांच में जो भी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। मरांडी के अनुसार, सीबीआई जांच से मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के साथ अभ्यर्थियों के बीच भरोसा भी बहाल किया जा सकेगा।


