Devgarh News:- झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) से एक जरूरतमंद मरीज को बिना समुचित इलाज के रांची स्थित रिम्स रेफर किए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एम्स देवघर की संवेदनशील और जनसेवा से जुड़ी छवि को किसी भी सूरत में धूमिल नहीं होने दिया जाएगा और मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि बीती रात देवघर जिले के बसनली गांव से एक महिला का भावुक फोन उन्हें प्राप्त हुआ। महिला ने रोते हुए अपने पति की गंभीर हालत की जानकारी दी और मदद की गुहार लगाई। सूचना मिलते ही डॉ. इरफान अंसारी ने अपना पूर्व निर्धारित कार्यक्रम रद्द किया और तत्काल बसनली गांव के लिए रवाना हो गए।
गांव पहुंचकर मंत्री ने स्वयं मरीज से मुलाकात की, उसकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली और मामले की पड़ताल की। जांच के दौरान यह सामने आया कि मरीज एक गरीब आदिवासी परिवार से है, जिसे इलाज के लिए एम्स देवघर भेजा गया था, लेकिन वहां से बिना किसी ठोस उपचार के रिम्स रेफर कर दिया गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि एम्स में उन्हें अपेक्षित इलाज नहीं मिला।
इस पर नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गरीब और आदिवासी मरीज बड़ी उम्मीद लेकर एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान जाते हैं। यदि वहां से भी उन्हें बिना इलाज के लौटा दिया जाएगा, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि बार-बार मरीजों को रेफर करना एम्स की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। यदि संसाधनों या विशेषज्ञों की कमी है, तो उसे स्पष्ट रूप से सामने लाया जाना चाहिए।
डॉ. अंसारी ने कहा कि आवश्यकता पड़ी तो वे स्वयं एम्स देवघर जाकर प्रबंधन से बात करेंगे और जवाबदेही तय की जाएगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तत्काल एंबुलेंस की व्यवस्था कर मरीज को रांची रेफर कराया। साथ ही मरीज के परिजनों को आर्थिक सहायता भी दी गई, ताकि इलाज में किसी तरह की परेशानी न हो। रांची में मरीज के बेहतर इलाज की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित कराई गई है।
ग्रामीणों द्वारा आभार व्यक्त किए जाने पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पीड़ितों की मदद के लिए गांव आना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका दायित्व है। उन्होंने दोहराया कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी और गरीब, आदिवासी व जरूरतमंद मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

