Bihar News : बिहार में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत गया पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। साइबर थाना गया और साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई, बिहार (पटना) की संयुक्त कार्रवाई में करीब 2.91 करोड़ रुपये की ऑनलाइन ठगी से जुड़े मामले का खुलासा करते हुए एक पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) एजेंट को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी के पास से 47 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल देश के अलग-अलग राज्यों में निवेश (इन्वेस्टमेंट) के नाम पर साइबर ठगी के लिए किए जाने की आशंका है।
पुलिस के अनुसार, वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने डोभी थाना क्षेत्र के अमारूत गांव में छापेमारी कर आरोपी गौतम कुमार को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क, उससे जुड़े अन्य लोगों और सिम कार्ड के इस्तेमाल की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई, बिहार, पटना की ओर से गया साइबर थाना को सूचना मिली थी। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज इन्वेस्टमेंट स्कैम की शिकायतों के विश्लेषण में यह सामने आया कि देश के विभिन्न राज्यों से दर्ज 22 साइबर शिकायतों में कुल 2 करोड़ 91 लाख 18 हजार 286 रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई है।
तकनीकी जांच के दौरान यह भी पता चला कि इन मामलों में इस्तेमाल किए गए 11 संदिग्ध मोबाइल नंबर एक ही पीओएस एजेंट के माध्यम से जारी किए गए थे। जांच में इन मोबाइल नंबरों का संबंध गया जिले से जुड़ा मिला, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को दबोच लिया।
छापेमारी के दौरान आरोपी के कब्जे से 47 सिम कार्ड बरामद किए गए। पुलिस का मानना है कि इन सिम कार्डों को साइबर अपराधियों तक पहुंचाया जाता था, जिनका उपयोग निवेश, शेयर ट्रेडिंग और अधिक मुनाफे का झांसा देकर लोगों से ठगी करने में किया जाता था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने अब तक कितने सिम कार्ड जारी किए और उनका इस्तेमाल किन-किन राज्यों में साइबर अपराध के लिए किया गया।
गया पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के निवेश, शेयर ट्रेडिंग, दोगुना मुनाफा या ऑनलाइन कमाई के झांसे में न आएं। अपनी बैंकिंग, ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि कोई साइबर ठगी का शिकार होता है तो वह तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करे या एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराए, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।


