वाल्मीकिनगर: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों के लिए राहत की खबर सामने आई है। गंडक नदी का जलस्तर अब तेजी से नीचे गिर रहा है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज से पानी का डिस्चार्ज भी लगातार कम हो रहा है। जलप्रवाह में कमी के बाद फिलहाल बड़े बाढ़ संकट का खतरा टलता नजर आ रहा है।
बुधवार रात नेपाल से पानी आने के कारण वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर जलप्रवाह अचानक बढ़ गया था। रात करीब 12 बजे बराज से लगभग 1.50 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। इसके बाद प्रशासन ने गंडक नदी के तटवर्ती और निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी थी।
हालांकि, गुरुवार सुबह 8 बजे तक बराज पर जलप्रवाह घटकर करीब 99,800 क्यूसेक रह गया। कुछ ही घंटों में डिस्चार्ज में आई इस बड़ी गिरावट को राहत का संकेत माना जा रहा है। जलप्रवाह कम होने से नदी किनारे बसे लोगों और प्रशासन ने राहत की सांस ली है।
जानकारी के अनुसार, नेपाल की त्रिशूली नदी में अचानक पानी बढ़ने के बाद अतिरिक्त जल नारायणी नदी के रास्ते आगे निकल गया। इसके चलते गंडक नदी में आने वाले पानी का दबाव कम होने लगा। इसी वजह से गंडक के जलस्तर में भी तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है।
नेपाल में बाढ़ की स्थिति के बाद बिहार में गंडक नदी को लेकर चिंता बढ़ गई थी। आशंका जताई जा रही थी कि नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र से आने वाली फ्लैश फ्लड वेव के कारण गंडक का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है। इससे उत्तर बिहार के कई निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा होने की संभावना थी।
जलप्रवाह बढ़ने के बाद गंडक नदी से जुड़े इलाकों में प्रशासन ने तटबंधों, नदी के जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी थी। लोगों को नदी के आसपास नहीं जाने और किसी भी संभावित खतरे को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई थी।
अब पानी का डिस्चार्ज लगातार घटने से तत्काल बड़े खतरे की आशंका कम हुई है। बावजूद इसके प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। बराज के जलप्रवाह और गंडक नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है, क्योंकि नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में मौसम या जलप्रवाह में बदलाव का असर आगे भी पड़ सकता है।
फिलहाल गंडक नदी का घटता जलस्तर बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों के लिए बड़ी राहत है। हालांकि प्रशासन ने निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं।


