पटना, 26 अगस्त। नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र, खासकर तिब्बत से सटे इलाकों में फ्लैश फ्लड की सूचना के बाद बिहार में गंडक नदी को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। नेपाल के रसुआ जिले में त्रिशूली नदी के जलप्रवाह में अचानक बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए बिहार सरकार ने गंडक नदी से जुड़े जिलों में प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र को अलर्ट कर दिया है। वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं और बचाव एवं राहत की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
जल संसाधन विभाग के अनुसार नेपाल में आई बाढ़ का पानी सुबह करीब 8:30 बजे गंडक बैराज, वाल्मीकिनगर पहुंचा। इसके बाद जलस्तर में लगभग 20 हजार क्यूसेक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विभाग के अनुमान के मुताबिक रात करीब 11 बजे जलप्रवाह अपने पीक पर पहुंच सकता है। इसके बाद पानी का स्तर धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। अधिकतम जलश्राव करीब दो लाख क्यूसेक रहने का अनुमान है।
विभाग ने बताया कि 14 जुलाई 2026 को इस वर्ष गंडक में अधिकतम जलश्राव 2.24 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया था। वहीं, वर्ष 2024 में 28 सितंबर को जलश्राव 5.62 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया था। ऐसे में मौजूदा स्थिति को फिलहाल सामान्य रहने की संभावना जताई गई है। इसके बावजूद बैराज, तटबंध और कंट्रोल रूम स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
उप मुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि नेपाल से जलप्रवाह को लेकर लगातार जानकारी प्राप्त की जा रही है। उन्होंने बताया कि तिब्बत से सटे नेपाल के क्षेत्र में ग्लेशियर फटने की सूचना मिली है। इसका पानी त्रिशूली नदी के रास्ते नारायणी नदी में पहुंच रहा है, जिसे बिहार में गंडक नदी के नाम से जाना जाता है।
नेपाल के आकलन के अनुसार देवघाट में जलस्तर करीब तीन मीटर तक बढ़ सकता है। फिलहाल वहां करीब 4.7 मीटर पानी है। तीन मीटर की बढ़ोतरी होने पर जलस्तर लगभग 7.7 मीटर तक पहुंच सकता है। हालांकि, उपलब्ध आकलन के आधार पर सरकार का कहना है कि स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाने से रोकने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी हैं।
चौधरी ने बताया कि बिहार की ओर से फिलहाल गंडक में जलप्रवाह एक लाख क्यूसेक से कम है। अतिरिक्त पानी करीब डेढ़ से दो लाख क्यूसेक रहने का अनुमान है। ऐसे में कुल जलप्रवाह लगभग ढाई से पौने तीन लाख क्यूसेक के आसपास रहने की संभावना है।
सरकार ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है। संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव सामग्री तैयार रखी गई है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर लोगों तक तत्काल जानकारी पहुंचाई जाएगी।


