Dhanbad News: झारखंड के धनबाद शहर में दुर्गा पूजा के समापन के बाद शुक्रवार को मां दुर्गा की विदाई के लिए भव्य विसर्जन यात्रा निकाली गई। झारखंड मैदान से सत्यम शिवम सुंदरम दुर्गा पूजा कमेटी की ओर से आयोजित इस यात्रा में धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और सामाजिक एकता का अनूठा संगम देखने को मिला। नासिक बैंड की गूंजती धुन, पारंपरिक छऊ नृत्य, आकर्षक झांकियों और मां दुर्गा के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
विसर्जन यात्रा में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। मां की विदाई के मौके पर भक्तों के चेहरे पर उत्साह के साथ भावुकता भी नजर आई। श्रद्धालु अगले वर्ष मां दुर्गा के दोबारा आगमन की कामना करते हुए जयकारे लगाते आगे बढ़ रहे थे।


नासिक बैंड और ढोल-नगाड़ों पर झूमे श्रद्धालु
विसर्जन जुलूस में नासिक बैंड की शानदार धुन आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। ढोल-नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालु नाचते और झूमते नजर आए। सिर पर पगड़ी बांधे पुरुष भक्त मां दुर्गा के जयकारे लगाते हुए यात्रा में आगे बढ़ रहे थे। रास्ते में खड़े लोगों ने भी जुलूस का उत्साह बढ़ाया और मां को श्रद्धापूर्वक विदाई दी।
आकर्षक झांकियों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। धार्मिक प्रस्तुतियों और संगीत के बीच पूरे शहर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।

छऊ नृत्य ने बिखेरी झारखंड की लोक संस्कृति की छटा
विसर्जन यात्रा का खास आकर्षण पारंपरिक छऊ नृत्य रहा। कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने जुलूस में सांस्कृतिक रंग भर दिया। नासिक बैंड की धुन और छऊ नृत्य की प्रस्तुति ने धार्मिक आयोजन को खास बना दिया। इससे झारखंड की समृद्ध लोक परंपरा की झलक भी देखने को मिली।
स्कूटी पर सवार महिलाओं की भागीदारी बनी आकर्षण
इस बार विसर्जन यात्रा में महिला श्रद्धालुओं की सक्रिय भागीदारी भी चर्चा का विषय रही। स्कूटी पर सवार महिलाएं जुलूस में आगे बढ़ती नजर आईं। उनकी मौजूदगी ने आयोजन को अलग पहचान दी। महिलाओं और पुरुषों की सामूहिक भागीदारी ने धार्मिक आयोजनों में सहभागिता और सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया।
सत्यम शिवम सुंदरम दुर्गा पूजा कमेटी के मीडिया प्रभारी विकास साव ने बताया कि मां दुर्गा की विदाई के लिए भव्य जुलूस निकाला गया था। नासिक बैंड, छऊ नृत्य और आकर्षक झांकियों को शामिल करने का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा देना और सामाजिक एकता को मजबूत करना था।
मां दुर्गा की विदाई के इस भावुक अवसर पर श्रद्धालुओं ने नम आंखों से मां को विदा किया और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की।


