Jharkhand News : रांची: बहुचर्चित बोकारो ट्रेजरी घोटाला मामले में सीआईडी की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपितों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने लेखा शाखा के एसएसआई अशोक भंडारी, गृह रक्षक सतीश कुमार और काजल मंडल को राहत देने से इनकार करते हुए उनकी जमानत अर्जी नामंजूर कर दी। इससे पहले अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
यह मामला बोकारो ट्रेजरी से लगभग 11 करोड़ रुपये की कथित अवैध निकासी से जुड़ा है। जांच के दौरान सामने आया कि बोकारो पुलिस अधीक्षक कार्यालय की लेखा शाखा में वेतन मद के नाम पर संदिग्ध भुगतान किए गए थे। वित्तीय लेन-देन में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की गई थी।
महालेखाकार (एजी) की रिपोर्ट में भी बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा हुआ था। इसके बाद राज्य सरकार के वित्त विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की पुष्टि होने के बाद बोकारो में प्राथमिकी दर्ज की गई और जांच एजेंसियों ने कार्रवाई शुरू की।
मामले में सबसे पहले लेखा शाखा से जुड़े मुख्य आरोपित कौशल पांडेय को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ने पर अन्य संदिग्धों की भूमिका भी सामने आई और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। फिलहाल गिरफ्तार सभी आरोपितों से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह घोटाला केवल बोकारो तक सीमित नहीं है। जांच में हजारीबाग, चाईबासा, रांची और रामगढ़ ट्रेजरी से भी कथित अवैध निकासी के मामले सामने आए हैं। इससे पूरे प्रकरण ने राज्यव्यापी वित्तीय घोटाले का रूप ले लिया है। विभिन्न जिलों की ट्रेजरियों में सरकारी धन के दुरुपयोग और भुगतान प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं की जांच जारी है।
सीआईडी की विशेष अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद तीनों आरोपितों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। वहीं, जांच एजेंसियां इस घोटाले से जुड़े अन्य पहलुओं, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन और संभावित रूप से शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। मामले की अगली सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।


