Araria News:- चुनावी मौसम के बीच बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। अररिया जिले के नरपतगंज से चार बार भाजपा विधायक रहे जनार्दन यादव ने पार्टी से इस्तीफा देकर जन सुराज का दामन थाम लिया है। उन्होंने पटना स्थित जन सुराज कार्यालय में प्रशांत किशोर और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय कुमार सिंह की मौजूदगी में सैकड़ों समर्थकों के साथ पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
इस मौके पर प्रशांत किशोर और उदय कुमार सिंह ने उन्हें पीला गमछा पहनाकर पार्टी में स्वागत किया। जनार्दन यादव लंबे समय से भाजपा के पुराने और समर्पित नेताओं में गिने जाते थे। वे जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व वाले छात्र आंदोलन की उपज रहे हैं और मीसा एक्ट के तहत जेल भी गए थे। छात्र आंदोलन के बाद 1977 में वे पहली बार विधायक बने, लेकिन उम्र सीमा पूरी न होने के कारण हाईकोर्ट ने उन्हें अयोग्य ठहरा दिया। इसके बाद 1980 में हुए मध्यावधि चुनाव में उन्होंने शानदार जीत दर्ज की।
जनार्दन यादव ने 1980, 2000 और 2005 में भी भाजपा प्रत्याशी के रूप में नरपतगंज विधानसभा से जीत हासिल की। हालांकि 2015 का चुनाव वे हार गए और इसके बाद पार्टी में उनका प्रभाव धीरे-धीरे कम होता चला गया। 2010 और 2020 के चुनावों में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया, जिससे वे उपेक्षित महसूस करने लगे।
पत्रकारों से बातचीत में जनार्दन यादव ने कहा कि आज भाजपा में पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं की कोई कद्र नहीं रह गई है और बाहरी तत्वों की घुसपैठ से पार्टी का स्वरूप बदल गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में भ्रष्टाचार चरम पर है और सरकारी दफ्तरों में बिना रिश्वत कोई काम नहीं हो रहा। उन्होंने नरपतगंज और फारबिसगंज के मौजूदा भाजपा विधायकों पर भी जनता की सेवा में विफल रहने का आरोप लगाया।
जनार्दन यादव ने जन सुराज पार्टी के प्रति निष्ठा जताते हुए कहा कि वे अब जिले में संगठन को मजबूत करने का काम करेंगे। इस मौके पर जन सुराज के जिलाध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह बबन, जो कभी भाजपा संगठन में दो बार जिलाध्यक्ष रह चुके हैं, ने भी जन सुराज को मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

