Bihar News : भागलपुर: बिहार के भागलपुर जिले के बिहपुर प्रखंड से मानवता को प्रेरित करने वाली एक भावुक घटना सामने आई है। यहां खेत में लावारिस हालत में मिले एक नवजात शिशु को एक दंपत्ति ने अपनाकर उसे नया जीवन देने का फैसला किया है। परिवार के इस कदम की पूरे इलाके में सराहना हो रही है और लोग इसे इंसानियत की मिसाल बता रहे हैं।
यह घटना बिहपुर प्रखंड की बिहपुर दक्षिण पंचायत के सोनवर्षा गांव स्थित छर्रापाटी टोला के पीछे बहियार की है। शुक्रवार सुबह करीब सात बजे गांव की एक महिला अपने बेटे के साथ घास काटने के लिए खेत गई थी। इसी दौरान उसे किसी नवजात बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज की दिशा में पहुंचने पर उसने देखा कि घास के बीच एक नवजात शिशु लावारिस हालत में पड़ा हुआ है।
महिला ने बिना देर किए बच्चे को सुरक्षित उठाया और अपने घर ले आई। इसके बाद आशा कार्यकर्ता की मदद से नवजात को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने बच्चे की स्वास्थ्य जांच की। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि नवजात पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी स्थिति सामान्य है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बच्चे को समय पर नहीं देखा जाता तो उसकी जान को खतरा हो सकता था। समय रहते उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया, जिससे उसकी जान बच गई।
नवजात को अपने घर लाने वाले बिट्टू मंडल ने कहा कि यह बच्चा उनके लिए किसी ईश्वर के आशीर्वाद से कम नहीं है। उन्होंने बताया कि जिसने भी इस मासूम को छोड़ दिया हो, लेकिन अब यह उनके परिवार का सदस्य रहेगा। परिवार ने बच्चे का नाम ‘आर्यन’ रखने का फैसला किया है। इस खुशी में परिवार ने मिठाइयां भी बांटीं और गांव के लोगों के साथ इस पल को साझा किया।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग बिट्टू मंडल के घर पहुंचे। सभी ने परिवार के इस फैसले की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कदम समाज में मानवता और संवेदनशीलता का संदेश देते हैं।
ग्रामीणों ने नवजात को खेत में छोड़ने की घटना को बेहद अमानवीय बताया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। वहीं, बिट्टू मंडल और उनके परिवार द्वारा बच्चे को अपनाने के निर्णय को लोगों ने एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया। यह घटना दिखाती है कि आज भी समाज में ऐसे लोग मौजूद हैं, जो निस्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद कर इंसानियत को जिंदा रखे हुए हैं।


