Jharkhand News: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने JSSC-CGL परीक्षा मामले में राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल नए हलफनामे को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार अब पूरी परीक्षा प्रक्रिया को दूषित बता रही है, तो पहले हुई जांच और अदालत में दाखिल किए गए पुराने हलफनामों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। सरकार ने 18 सितंबर को हाईकोर्ट में दाखिल जवाब में परीक्षा प्रक्रिया के स्तर पर गंभीर गड़बड़ी का हवाला देते हुए पूरी परीक्षा रद्द करने के फैसले का बचाव किया है।
मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सवाल उठाया कि भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी की जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित क्यों रहे। उनका कहना है कि यदि पूरी परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हुई थी, तो वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
पुरानी जांच पर भी उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल किया कि जब अब सरकार पूरी परीक्षा प्रक्रिया को दूषित बता रही है, तो पहले की जांच में यह बात सामने क्यों नहीं आई। उन्होंने सुधीर गुप्ता, अनुराग गुप्ता, प्रशांत कुमार और मनोज कौशिक समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की।
मरांडी ने यह भी सवाल उठाया कि पहले अदालत के समक्ष सभी तथ्य क्यों नहीं रखे गए थे। उन्होंने पूछा कि उस समय दाखिल किए गए शपथपत्र किस आधार पर तैयार हुए और जांच को कथित तौर पर गलत दिशा में ले जाने के लिए जिम्मेदारी किसकी थी।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाया। मरांडी ने पूछा कि इतने बड़े भर्ती विवाद की जानकारी और सहमति सरकार के शीर्ष स्तर पर थी या नहीं। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि सरकार को इसकी जानकारी नहीं थी तो निगरानी व्यवस्था की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए।
हाईकोर्ट में जांच की निगरानी
18 सितंबर की सुनवाई में हाईकोर्ट ने JSSC-CGL मामले की जांच से जुड़ी शिकायतों की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति गौतम कुमार चौधरी को मॉनिटर/ऑब्जर्वर नियुक्त किया है। अदालत ने जांच से जुड़े लोगों को कथित उत्पीड़न की शिकायतों के संदर्भ में यह व्यवस्था की है। साथ ही मामले में सरकार के जवाब पर याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने का समय दिया गया है।
मरांडी ने पूरे मामले की सीबीआई से स्वतंत्र जांच कराने की मांग दोहराई। उन्होंने JSSC और JPSC जैसी भर्ती संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़े मामले में जांच पारदर्शी होनी चाहिए।
उन्होंने प्रशांत कुमार और सुधीर गुप्ता को JSSC से हटाने तथा मनोज कौशिक को CID के एडीजी पद से हटाने की मांग की। साथ ही उन अधिकारियों की स्वतंत्र जांच की मांग की, जिनके कार्यकाल में कथित अनियमितताएं हुईं।
JSSC-CGL मामले में सरकार के नए हलफनामे और हाईकोर्ट की निगरानी के बीच अब जांच की दिशा और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की जवाबदेही पर बहस तेज हो गई है। अदालत में मामले की आगे की सुनवाई में सरकार के फैसले और जांच से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।


