हाईकोर्ट ने कहा- केवल अधिसूचना जारी कर स्थायी नियुक्ति पा चुके कर्मचारियों को नौकरी से नहीं हटाया जा सकता; सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह दूषित बताया
Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी-सीजीएल (विज्ञापन संख्या 10/2023) समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर लगी रोक को शुक्रवार को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में आकाश गौरव एवं अन्य, निरोज खेस एवं अन्य समेत कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। मामले की अगली सुनवाई अब 7 अक्टूबर को होगी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया गया। इस पर जवाब देने के लिए याचिकाकर्ताओं ने अदालत से समय मांगा। अदालत ने मामले की सुनवाई आगे बढ़ाते हुए नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर लगी अंतरिम रोक को बरकरार रखा।
अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि केवल एक अधिसूचना जारी कर स्थायी नियुक्ति पा चुके कर्मचारियों को नौकरी से नहीं हटाया जा सकता। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि अब तक सामने आए तथ्यों से प्रथमदृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि सभी नियुक्तियां पूरी तरह सही प्रक्रिया से नहीं हुई हैं, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर नियुक्ति में गड़बड़ी हुई है।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जेपीएससी को एक परीक्षा आयोजित करने और नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने में सामान्यत: दो से तीन साल तक का समय लग जाता है। ऐसे में करीब 2,700 नियुक्तियां एक साथ रद्द होने पर बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की नौकरी प्रभावित होगी।
मामले की जांच की निगरानी के लिए हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गौतम कुमार चौधरी को नियुक्त किया गया है। सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आरके मल्लिक को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
सरकार ने परीक्षा रद्द करने के फैसले को बताया नियमों के अनुरूप
राज्य सरकार ने अपने शपथ पत्र में जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप बताया है। कार्मिक विभाग के संयुक्त सचिव अमर कुमार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में कहा गया है कि कथित अनियमितताओं के कारण पूरी परीक्षा प्रक्रिया दूषित हो गई थी। ऐसे में सही तरीके से परीक्षा पास करने वाले और अनुचित तरीके से लाभ पाने वाले अभ्यर्थियों के बीच अंतर करना संभव नहीं था।
सरकार ने बताया कि परीक्षा से जुड़े गोपनीय कार्य आईसीएन टेक्नोलॉजी को दिए गए थे। कथित गड़बड़ी के मामले में कंपनी के सीईओ सोमांश प्रकाश समेत 28 लोगों की गिरफ्तारी और 265 लोगों को नोटिस दिए जाने की जानकारी अदालत को दी गई है। जांच अभी जारी है।
सरकार के अनुसार, जांच में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। शपथ पत्र में नेपाल, आसनसोल, कोलकाता, बिहार, झरिया और बोकारो से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया गया है।
22 परीक्षाएं रद्द, 6 स्थगित और 17 जांच के दायरे में
सरकार ने 18 अगस्त की देर रात जेएसएससी-सीजीएल समेत विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी। इसके बाद विभागीय अधिसूचनाओं में 22 परीक्षाओं को रद्द, 6 परीक्षा प्रक्रियाओं को स्थगित और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने की जानकारी दी गई।
अब हाईकोर्ट में 7 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं के जवाब और सरकार के पक्ष पर आगे की सुनवाई होगी।


