Giridih News: राधा स्वामी संगठन के नाम पर गाड़ियों का फाइनेंस कराने का झांसा देकर हजारों लोगों से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में गिरिडीह पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रदेश प्रभारी मुकेश सिन्हा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसकी पत्नी और संगठन की जिला प्रभारी अनिता सिन्हा समेत तीन अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार किया है।
पचंबा थाना पुलिस के अनुसार, मुकेश सिन्हा की निशानदेही पर अनिता सिन्हा, सुबोध सिंह और अमित सिन्हा को पकड़ा गया। सुबोध सिंह और अमित सिन्हा को संगठन का मैनेजर बताया जा रहा है। अनिता सिन्हा से महिला पुलिसकर्मियों की निगरानी में पूछताछ की जा रही है। पुलिस आरोपितों से कथित ठगी के नेटवर्क और रकम के लेन-देन से जुड़ी जानकारी जुटाने में लगी है।
अनिता सिन्हा की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में कथित पीड़ित पचंबा थाना पहुंच गए। ग्रामीणों ने दोनों पति-पत्नी को उनके सामने लाने की मांग करते हुए थाना परिसर के बाहर हंगामा किया। भीड़ बढ़ने और स्थिति तनावपूर्ण होने के बाद पुलिस ने मौके पर क्यूआरटी की टीम बुलाकर स्थिति को नियंत्रित किया।
मामले की जानकारी देते हुए डीएसपी आरके राणा, इंस्पेक्टर ज्ञान रंजन और थाना प्रभारी राजीव कुमार ने प्रेसवार्ता की। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, संगठन के नाम पर वाहन फाइनेंस कराने के अलावा भगवान कृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन के नाम पर भी लोगों से कथित रूप से पैसे लेने की शिकायतें मिली हैं।
पुलिस के अनुसार, अनिता सिन्हा गाड़ी खरीदने के इच्छुक लोगों से संपर्क करती थी। उन्हें अलग-अलग मॉडल की गाड़ियां कुछ ही दिनों में फाइनेंस कराने का भरोसा दिया जाता था। इसके बदले लोगों से लाखों रुपये लिए गए। बाद में जब ग्राहक गाड़ी उपलब्ध कराने की मांग करते थे तो कथित तौर पर उन्हें टाल दिया जाता था।
पुलिस का कहना है कि लगातार बढ़ते दबाव के बाद कुछ महीने पहले मुकेश और अनिता सिन्हा ने बगोदर स्थित कार्यालय बंद कर दिया और फरार हो गए। इसके बाद पुलिस उनकी तलाश कर रही थी। मंगलवार को गुप्त सूचना के आधार पर मुकेश सिन्हा को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर बुधवार को तीन अन्य आरोपितों को भी पकड़ लिया गया।
फिलहाल पुलिस सभी आरोपितों से पूछताछ कर रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कथित ठगी में कितने लोग प्रभावित हुए और कितनी रकम का लेन-देन हुआ। पूछताछ पूरी होने के बाद आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया की जाएगी।
आरोपियों पर 50 से अधिक लोगों से 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी करने का आरोप है। चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। मामले की जानकारी डीएसपी आरके राणा ने प्रेस वार्ता के दौरान दी। उन्होंने बताया कि शिकायतों के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क, पैसों के लेन-देन और इस कथित ठगी में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
बैंक लोन की किस्त भरने का दिया भरोसा, अब पीड़ितों को मिल रहे रिकवरी नोटिस
पीड़ितों का आरोप है कि राधास्वामी संगठन की ओर से लोगों को यह भरोसा दिलाया गया कि उन्हें वाहन की कीमत पर 70 प्रतिशत तक का अनुदान दिलाया जाएगा। संगठन के प्रतिनिधियों ने लाभुकों से वाहन की कुल कीमत का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा अपने खाते में जमा करवाया। इसके बाद शेष 70 प्रतिशत राशि बैंक से लाभुकों के नाम पर फाइनेंस कराई गई।
सबसे बड़ा भरोसा यह दिया गया कि बैंक से लिए गए लोन की मासिक ईएमआई संगठन खुद जमा करेगा और लाभुकों को लोन चुकाने की चिंता नहीं करनी होगी। इसी भरोसे में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई संगठन के खाते में जमा कर दी और बैंक से लोन भी ले लिया।
लेकिन वाहन मिलने के बाद जब बैंक की किस्त चुकाने का समय आया तो कथित तौर पर संगठन की ओर से ईएमआई जमा नहीं की गई। पीड़ितों के मुताबिक एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बैंक में एक भी किस्त जमा नहीं हुई। अब बैंक की ओर से लोन डिफॉल्ट को लेकर पीड़ितों के घर रिकवरी और वाहन जब्ती के नोटिस पहुंचने लगे हैं। इससे पीड़ितों के सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है—एक तरफ संगठन को दी गई रकम फंस गई, वहीं दूसरी तरफ बैंक लोन चुकाने की जिम्मेदारी उनके सिर आ गई है।


