चतरा, 25 अगस्त। झारखंड के चतरा जिले में महिला थाना प्रभारी और उनके अवर निरीक्षक पति के सरकारी आवास से एक नाबालिग बच्ची के बरामद होने के बाद मामला चर्चा में है। नाबालिग से कथित तौर पर बाल मजदूरी कराने, मारपीट और प्रताड़ित करने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत सामने आने के बाद बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की टीम ने कार्रवाई करते हुए सदर थाना परिसर स्थित सरकारी आवास से बच्ची को बरामद किया।
बताया गया है कि नाबालिग से घर में काम कराया जा रहा था। इसी दौरान उसके साथ कथित मारपीट और प्रताड़ना की शिकायत सामने आई। मामले की जानकारी मिलने के बाद सीडब्ल्यूसी की टीम मौके पर पहुंची और नाबालिग को अपने साथ ले गई। इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस और वरीय अधिकारियों को दी गई तथा कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
हालांकि, कार्रवाई के बाद नाबालिग की मां ने सीडब्ल्यूसी की भूमिका पर ही सवाल खड़े किए हैं। मां का आरोप है कि समिति के सदस्य उसकी बेटी को जबरन अपने साथ ले गए। इस संबंध में उन्होंने पुलिस अधीक्षक (एसपी) से शिकायत कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी एसडीपीओ को सौंपी गई है। अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नाबालिग सरकारी आवास में किस परिस्थिति में रह रही थी और उसके साथ किसी प्रकार की मारपीट या प्रताड़ना हुई थी या नहीं।
वहीं, सीडब्ल्यूसी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। समिति की ओर से कहा गया है कि नाबालिग का बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराया जाएगा। उसके बयान और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल पुलिस और संबंधित बाल संरक्षण अधिकारियों की ओर से मामले की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चा तेज है और सभी की नजर जांच के निष्कर्ष पर है।


