Jharkhand News: झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के सुप्रीमो और विधायक जयराम महतो ने जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार को लेकर आंदोलन कर रहे छात्र-अभ्यर्थियों के समर्थन में सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले करीब 15 दिनों से छात्र-अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखा रही है।
जयराम महतो ने रविवार को पुराने विधानसभा परिसर में एक दिवसीय निर्जला उपवास के दौरान मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि जेपीएससी की सीटों को कथित तौर पर 50 से 60 लाख रुपये लेकर बेचा गया है। उन्होंने कहा कि इतने बड़े कथित घोटाले को केवल अभय तिवारी अकेले नहीं पचा सकते। यदि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाती है तो कई बड़े लोगों के नाम सामने आ सकते हैं और उनके चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार उच्चस्तरीय जांच से क्यों बच रही है।
महतो ने कहा कि छात्र-अभ्यर्थी आमरण अनशन और सत्याग्रह कर रहे हैं और आंदोलन की वजह से स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। उन्होंने सरकार के उन नेताओं पर भी निशाना साधा, जो छात्र आंदोलन को राजनीतिक बता रहे हैं। उनका कहना था कि यदि आंदोलन राजनीति से प्रेरित है तो सरकार धरनास्थल पर जाकर इसकी जांच करा सकती है कि वहां कौन राजनीतिक है और कौन गैर-राजनीतिक।
उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन के दौरान यदि किसी तरह की अप्रिय घटना होती है या किसी छात्र-अभ्यर्थी की जान जाती है तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के जेपीएससी पेपर लीक नहीं होने संबंधी बयान पर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा कि किसी भी मामले पर बयान देने से पहले तथ्यों का अध्ययन किया जाना चाहिए।
जयराम महतो ने कहा कि वह जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जाकर छात्रों के आंदोलन में शामिल हो सकते थे, लेकिन वहां देश-विदेश की मीडिया मौजूद है। ऐसे में उनके पहुंचने से आंदोलन का फोकस छात्रों की समस्याओं से हटकर उनके ऊपर चला जाता। वह ऐसा नहीं चाहते।
उन्होंने कहा कि सरकार ने यदि छात्रों की मांगों को नहीं माना तो वह विधानसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएंगे और छात्रों के विधानसभा घेराव कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। उन्होंने सत्ता पक्ष के विधायकों और सांसदों से भी छात्र-अभ्यर्थियों की मांगों का समर्थन करने की अपील की।
महतो ने कहा कि उन्होंने कुछ मंत्रियों से छात्रों के मुद्दे पर बातचीत का प्रयास किया, लेकिन उन्हें बताया गया कि मुख्यमंत्री की अनुमति के बिना वे छात्रों से सीधे मुलाकात नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि सरकार की मजबूरी क्या है, यह सरकार को तय करना है, लेकिन राज्य की जनता पूरे घटनाक्रम को देख रही है। सरकार को तत्काल संवेदनशीलता दिखाते हुए छात्रों की मांगों के समाधान की दिशा में कदम उठाना चाहिए।


