Bengal Election News : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण का मतदान गुरुवार को राज्यभर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और व्यापक प्रशासनिक निगरानी के बीच संपन्न हुआ। इस चरण में 16 जिलों की 152 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ, जिसमें कुल 1478 उम्मीदवारों का राजनीतिक भविष्य ईवीएम में बंद हो गया। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरे दिन मतदान का माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा। खास बात यह है कि इस बार बंपर वोटिंग हुई है। शाम 5 बजे तक राज्य में 89.93 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो पिछले कई चुनावों की तुलना में काफी अधिक है और इसे रिकॉर्ड मतदान रुझान के रूप में देखा जा रहा है। यहां तक कि पुडुचेरी और असम से भी अधिक मतदान हुआ है।
इस चरण में दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, पश्चिम बर्धमान, पुरुलिया, बांकुड़ा, झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर और पूर्व मेदिनीपुर जैसे जिलों में मतदान हुआ। ये सभी जिले भौगोलिक और सामाजिक रूप से विविधता वाले क्षेत्र हैं, जिनमें सीमावर्ती इलाके, चाय बागान क्षेत्र, आदिवासी बहुल क्षेत्र, ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरी केंद्र भी शामिल हैं। इस वजह से मतदान की प्रकृति हर जिले में अलग-अलग दिखाई दी, लेकिन कुल मिलाकर भागीदारी अत्यंत उच्च स्तर पर रही।
चुनाव आयोग के अनुसार, प्रथम चरण में लगभग 3.6 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने के पात्र थे। कुल 44,376 मतदान केंद्र बनाए गए थे, जिनमें से हजारों केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में और हजारों शहरी इलाकों में स्थित थे। मतदाताओं की सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 5644 मतदान केंद्रों का संचालन पूरी तरह महिला कर्मियों द्वारा किया गया, जबकि 207 मतदान केंद्रों को मॉडल केंद्र के रूप में विकसित किया गया था। इसके अलावा बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की गईं, जिससे मतदान प्रक्रिया अधिक समावेशी बन सके।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह चरण अब तक के सबसे सख्त इंतजामों में से एक माना जा रहा है। पूरे राज्य में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की 2407 कंपनियां तैनात की गईं। इनमें पूर्व मेदिनीपुर में 273 कंपनियां, पश्चिम मेदिनीपुर में 271, मुर्शिदाबाद में 240, बांकुड़ा में 193, बीरभूम में 176, मालदा में 172 और पुरुलिया में 151 कंपनियां शामिल रहीं। इसके अलावा अन्य जिलों में भी बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी। संवेदनशील और अति-संवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त निगरानी, ड्रोन सर्विलांस, फ्लाइंग स्क्वॉड और विशेष पर्यवेक्षक लगातार तैनात रहे ताकि किसी भी स्थिति में मतदान प्रक्रिया प्रभावित न हो।
मतदान के दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी उत्साह देखने को मिला और कई जिलों में मतदान 90 प्रतिशत से अधिक दर्ज किया गया। दक्षिण दिनाजपुर सबसे आगे रहा, जहां 93.12 प्रतिशत मतदान हुआ। कूचबिहार में 92.07 प्रतिशत, बीरभूम में 91.55 प्रतिशत, मुर्शिदाबाद में 91.36 प्रतिशत और जलपाईगुड़ी में 91.20 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। पश्चिम मेदिनीपुर में 90.70 प्रतिशत और झाड़ग्राम में 90.53 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं उत्तर दिनाजपुर, बांकुड़ा और मालदा जैसे जिलों में भी मतदान का स्तर लगभग 90 प्रतिशत के आसपास रहा। केवल कालिम्पोंग ऐसा जिला रहा जहां मतदान 81.98 प्रतिशत रहा, जो फिर भी उच्च भागीदारी का संकेत देता है।
दिनभर मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें लगी रहीं। सुबह से शाम तक महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों की बड़ी भागीदारी देखी गई। कई केंद्रों पर शाम तक भी मतदान के लिए लोगों की भीड़ बनी रही, जो इस चुनावी चरण में जनता की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।
इस बीच मतदान प्रक्रिया के दौरान कुछ स्थानों पर तकनीकी कारणों से ईवीएम में थोड़ी देर के लिए बाधा आई, जिसे तुरंत सुधार लिया गया। अधिकांश केंद्रों पर मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चलता रहा और मतदान प्रक्रिया को सुव्यवस्थित बनाए रखने में प्रशासन सफल रहा।
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में इन सीटों पर लगभग 83.2 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में यह आंकड़ा 79.8 प्रतिशत था। इस बार 89.93 प्रतिशत मतदान ने इन सभी पिछले आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है और इसे एक मजबूत जनभागीदारी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, पहले चरण का मतदान गुरुवार को राज्य की 16 जिलों की 152 सीटों पर हिंसा और तोड़फोड़ के बीच संपन्न हुआ। कई स्थानों पर मतदान मशीनों में खराबी और सुरक्षा बलों को लेकर शिकायतें भी सामने आईं। दक्षिण दिनाजपुर के कुमारगंज में भाजपा प्रत्याशी पर हमले का आरोप लगा, जबकि बीरभूम के लाभपुर में भाजपा एजेंट के घायल होने की घटना सामने आई। इसी जिले के खैराशोल में ईवीएम खराबी के बाद मतदान रुका, जिसके बाद पथराव और पुलिस वाहन में तोड़फोड़ की खबरें आईं। एक जवान का सिर फट गया।
मुर्शिदाबाद के नाओदा में हुमायूं कबीर के काफिले पर हमले और जालंगी में मशीन खराब होने से मतदान बाधित रहा। पश्चिम मेदिनीपुर में भी झड़प, पिटाई और केंद्रीय बलों पर आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। केशपुर में मतदान के बाद एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई।
कूचबिहार, आसनसोल और सिलीगुड़ी में भी बूथ प्रभावित करने, गाड़ी पर हमला और फर्जी मतदान जैसी शिकायतें सामने आईं।
दिनभर चली इन घटनाओं के बावजूद प्रशासन ने मतदान को नियंत्रित बताया, जबकि विपक्ष ने निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग ने सभी मामलों की रिपोर्ट तलब की है और जांच के आदेश दिए हैं।
भारी मतदान के बाद राज्य में राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। सभी प्रमुख दल अब आगामी चरणों की रणनीति पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पहले चरण की इस बड़ी भागीदारी ने चुनावी माहौल को और अधिक निर्णायक और रोचक बना दिया है। अब नजरें आने वाले चरणों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि इस रिकॉर्ड मतदान का राजनीतिक परिणाम किस दिशा में जाता है। उल्लेखनीय है कि, पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को है और मतगणना चार मई को होगी


