AIMIM अकेले लड़ेगी बंगाल चुनाव, वीडियो विवाद के बाद टूटा गठबंधन
Kolkata News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासी समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। Asaduddin Owaisi की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने Humayun Kabir की पार्टी के साथ अपना गठबंधन खत्म कर दिया है। पार्टी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब वह राज्य में अकेले दम पर चुनाव मैदान में उतरेगी।
शुक्रवार सुबह जारी एक आधिकारिक बयान में AIMIM ने कहा कि वह किसी ऐसे विवाद या बयान से खुद को नहीं जोड़ सकती, जिससे मुस्लिम समुदाय के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचे। पार्टी ने साफ शब्दों में कहा कि आज से हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ उसका गठबंधन समाप्त माना जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला हाल ही में सामने आए कथित ‘गोपनीय वीडियो’ विवाद के बाद लिया गया है। हालांकि AIMIM ने अपने बयान में किसी खास घटना का उल्लेख नहीं किया, लेकिन माना जा रहा है कि इसी विवाद ने दोनों दलों के रिश्तों में दरार पैदा की।
गठबंधन टूटने पर प्रतिक्रिया देते हुए हुमायूं कबीर ने संयमित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ओवैसी अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र हैं और वह इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। कबीर ने यह भी कहा कि उनके मन में ओवैसी के प्रति व्यक्तिगत सम्मान पहले भी था और आगे भी बना रहेगा।
उन्होंने जानकारी दी कि 25 मार्च को कोलकाता में हुई संयुक्त प्रेस वार्ता में दोनों दलों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया था। बावजूद इसके, अब परिस्थितियां बदल गई हैं और उनकी पार्टी अपने दम पर चुनाव लड़ेगी।
हुमायूं कबीर ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी राज्य की 182 सीटों पर उम्मीदवार उतार रही है और प्रचार अभियान जारी है। उन्होंने भरोसा जताया कि जनता का समर्थन उन्हें मिलेगा और उनकी पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी।
वहीं, ‘गोपनीय वीडियो’ को लेकर कबीर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह वीडियो कृत्रिम मेधा (AI) की मदद से तैयार किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इसकी सच्चाई साबित नहीं होती है, तो वह इस मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाएंगे।
AIMIM ने अपने बयान में यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम समुदाय लंबे समय से उपेक्षा और शोषण का सामना कर रहा है। पार्टी का उद्देश्य ऐसे वर्गों को स्वतंत्र और मजबूत राजनीतिक आवाज देना है।
गौरतलब है कि AIMIM और हुमायूं कबीर के बीच गठबंधन को लेकर पहले माना जा रहा था कि यह राज्य के अल्पसंख्यक वोट बैंक पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है। लेकिन अब गठबंधन टूटने से चुनावी गणित बदलने की संभावना जताई जा रही है।


