Dhanbad : जिला न्यायालय को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया है। यह चौथी बार है जब कोर्ट को धमकी भरा ईमेल भेजा गया है। हर बार इस तरह की धमकी मिलने के बाद कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है, जिससे न सिर्फ वकीलों बल्कि आम लोगों में भी डर बैठ गया है। सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ जाती हैं, लेकिन बार-बार ऐसी घटनाओं का दोहराया जाना प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रहा है।
धमकी से प्रभावित हो रहा न्यायिक कामकाज
लगातार मिल रही धमकियों का असर सीधे तौर पर न्यायिक कार्यों पर पड़ रहा है। हर बार कोर्ट परिसर को खाली कराया जाता है, जांच की जाती है और सुरक्षा बढ़ा दी जाती है, लेकिन इस प्रक्रिया में कई मामलों की सुनवाई टल जाती है। वकीलों का कहना है कि इससे न्याय प्रक्रिया बाधित हो रही है और आम लोगों को भी भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। कोर्ट आने वाले लोग अब डर के साये में अपने काम निपटाने को मजबूर हैं।
बार एसोसिएशन ने उठाए गंभीर सवाल
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राधेश्याम गोस्वामी ने इस पूरे मामले पर केंद्र और राज्य सरकार से गंभीरता दिखाने की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खुफिया तंत्र इतना मजबूत बताया जाता है, तो ऐसी धमकियों को पहले ही रोकने में नाकामी क्यों हो रही है। उन्होंने कहा कि हर बार धमकी के बाद पुलिस तैनात कर दी जाती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है, जो बेहद चिंताजनक है।
चुनाव भी हुए प्रभावित, कई वकील नहीं डाल पाए वोट
राधेश्याम गोस्वामी ने बताया कि 12 मार्च को बार एसोसिएशन के चुनाव के दिन भी इसी तरह की धमकी मिली थी। उस दिन कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई, जिससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई। कुल 3184 मतदाताओं में से केवल 1931 ही वोट डाल सके, जबकि कई वकील मतदान से वंचित रह गए। इससे साफ है कि ऐसी धमकियां सिर्फ डर फैलाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को भी प्रभावित कर रही हैं।
‘शेर आया’ जैसी स्थिति का खतरा, वकीलों की चेतावनी
वकील ऐनुल हक ने इस स्थिति को ‘शेर आया, शेर आया’ वाली कहानी से जोड़ते हुए गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर लगातार इस तरह की फर्जी धमकियां मिलती रहीं, तो लोग इन्हें हल्के में लेने लगेंगे। ऐसे में अगर कभी वास्तविक खतरा सामने आया, तो भारी जनहानि हो सकती है। उन्होंने पूरे मामले की गहन जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि लोगों का भरोसा बहाल हो सके।
ठोस सुरक्षा इंतजाम और पारदर्शिता की मांग
वकीलों और आम लोगों ने प्रशासन से ठोस और स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि सिर्फ अस्थायी पुलिस तैनाती से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस तरह की घटनाओं के पीछे के लोगों का पता लगाकर सख्त कार्रवाई करनी होगी। साथ ही जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, ताकि कोर्ट परिसर में आने वाले हर व्यक्ति को सुरक्षित माहौल मिल सके।

