Vikramshila Setu : पूर्वी बिहार और सीमांचल को जोड़ने वाली जीवनरेखा माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु से जुड़ी एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। पुल के पिलरों की सुरक्षा के लिए बनाए गए प्रोटेक्शन वॉल (फॉल्स वॉल) को भारी नुकसान पहुंचा है। जानकारी के मुताबिक एक पिलर का प्रोटेक्शन वॉल पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है, जबकि दूसरे पिलर का वॉल टूटकर लटक रहा है और तीसरे का आधा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया है। यह स्थिति सीधे तौर पर पुल की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
वॉल बढ़ा रहा जोखिम, पिलर से लगातार टकराव
सबसे ज्यादा खतरनाक स्थिति उस पिलर की है, जिसका प्रोटेक्शन वॉल टूटकर लटक गया है और लगातार पिलर से टकरा रहा है। इससे पुल के मुख्य ढांचे को नुकसान पहुंचने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही पहले से ही पुल के एक्सपेंशन जॉइंट में बढ़ता गैप भी चिंता का विषय बना हुआ है। जो गैप पहले 1 से 2 इंच था, वह अब बढ़कर करीब 6 इंच तक पहुंच गया है। इस मुद्दे को कई बार उजागर किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
गंगा का तेज बहाव और भारी जहाजों का दबाव
बताया जा रहा है कि गंगा नदी के तेज बहाव, बड़े जहाजों और भारी नावों की आवाजाही के कारण पिलरों पर दबाव काफी बढ़ गया है। यही वजह है कि प्रोटेक्शन वॉल कमजोर पड़ने लगे हैं। खासतौर पर बाढ़ के समय पानी का दबाव और भी ज्यादा बढ़ जाता है, जिससे स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पिलर संख्या 16 से 20 के बीच तीन पिलरों के प्रोटेक्शन वॉल क्षतिग्रस्त पाए गए हैं।
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प्रशासन हरकत में, लेकिन क्या समय रहते होगा समाधान?
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया है और अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी है। प्रोटेक्शन वॉल का मुख्य काम पिलरों को तेज बहाव और टकराव से बचाना होता है, साथ ही यह आसपास की मिट्टी और बालू को बहने से रोकता है। यदि यह दीवार कमजोर हो जाए, तो पिलर की नींव कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में विक्रमशिला सेतु की मौजूदा स्थिति एक चेतावनी है—अगर समय रहते मरम्मत और निगरानी नहीं हुई, तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।


