Patna News: मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में बड़ी राहत मिली है। पटना उच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत दे दी है। जस्टिस आर.पी. मिश्रा की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को सुनने के बाद गुरुवार को यह फैसला सुनाया। करीब साढ़े चार महीने से जेल में बंद अनंत सिंह की रिहाई का रास्ता अब साफ हो गया है। उम्मीद की जा रही है कि जमानत से संबंधित कागजात शुक्रवार या शनिवार तक जेल प्रशासन को मिल जाएंगे, जिसके बाद उनकी रिहाई संभव है।
यह मामला दुलारचंद यादव की हत्या से जुड़ा है, जो जन सुराज पार्टी के समर्थक बताए जाते थे। उनकी हत्या उस समय हुई थी जब वे चुनाव प्रचार के दौरान अपने क्षेत्र में सक्रिय थे। इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 1 नवंबर की रात अनंत सिंह को गिरफ्तार किया था। इसके अगले दिन 2 नवंबर को उन्हें कोर्ट में पेश कर बेऊर जेल भेज दिया गया था। जेल में रहने के बावजूद अनंत सिंह की राजनीतिक सक्रियता जारी रही। उन्होंने जेल से ही मोकामा विधानसभा सीट से जदयू उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। यह उनकी लगातार पांचवीं जीत रही, जिससे क्षेत्र में उनकी पकड़ का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इतना ही नहीं, चुनाव जीतने के बाद वे न्यायालय के आदेश पर शपथ ग्रहण के दौरान जमानत पर बाहर आए थे। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने मतदान में हिस्सा लेने के लिए विधानसभा पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। स्थानीय राजनीति में ‘छोटे सरकार’ के नाम से चर्चित अनंत सिंह की जमानत को लेकर उनके समर्थकों में खुशी का माहौल है। अब सभी की नजरें उनकी संभावित रिहाई पर टिकी हैं, जो आने वाले एक-दो दिनों में हो सकती है।
अनंत सिंह का सियासी सफर बिहार की राजनीति में हमेशा चर्चा का विषय रहा
मोकामा के बाहुबली नेता अनंत सिंह का सियासी सफर बिहार की राजनीति में हमेशा चर्चा का विषय रहा है। उन्होंने वर्ष 2005 में मोकामा विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीतकर राजनीतिक जीवन की मजबूत शुरुआत की। इसके बाद 2010 और 2015 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने लगातार जीत दर्ज कर अपने क्षेत्र में मजबूत पकड़ बनाई।
शुरुआती दौर में अनंत सिंह जनता दल यूनाइटेड से जुड़े रहे और पार्टी के प्रभावशाली नेताओं में उनकी गिनती होती थी। हालांकि, समय के साथ पार्टी नेतृत्व से मतभेद बढ़ने के कारण उन्होंने अलग राह चुन ली। वर्ष 2015 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर अपनी जनाधार की मजबूती का प्रमाण दिया।
अनंत सिंह की पहचान एक दबंग नेता के रूप में रही है, जिनका मोकामा क्षेत्र में व्यापक प्रभाव रहा है। उनके राजनीतिक करियर के दौरान कई विवाद और कानूनी मामले भी सामने आए, लेकिन इन सबके बावजूद उनके समर्थकों के बीच उनकी पकड़ कमजोर नहीं पड़ी।
वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। हालांकि, बाद में एके-47 जब्ती मामले में उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई। इसके बाद 2022 में हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी नीलम देवी ने मोकामा सीट से राजद उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज कर परिवार की राजनीतिक पकड़ बरकरार रखी।
इसके बाद 2025 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह की एक बार फिर जदयू में वापसी हुई और उन्होंने मोकामा से चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक सक्रियता साबित की। हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान ही दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनका नाम सामने आया, जिसके चलते उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और वे जेल में बंद थे।
अब पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अनंत सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। उनकी रिहाई के बाद बिहार की राजनीति में उनकी सक्रियता और आगे की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। बतों कि अनंत सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सीएम पद छोड़ राज्य सभा जाने के निर्णय के बाद चुनाव नही लड़ने की घोषणा कर दी है।