Hemant Soren : Supreme Court of India ने बुधवार को Hemant Soren के खिलाफ Enforcement Directorate (ईडी) द्वारा शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (Prevention of Money Laundering Act) के तहत जारी समन की कथित अवहेलना के आरोप में की गई थी। अदालत के इस फैसले को झारखंड की सियासत में अहम माना जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने जारी किया नोटिस
मामला मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। पीठ ने सोरेन की याचिका पर ईडी को नोटिस जारी करते हुए मामले को खारिज करने की मांग पर जवाब मांगा है। सोरेन ने अपनी याचिका में ईडी द्वारा बार-बार जारी किए गए समन को भी चुनौती दी है और कार्रवाई को दुर्भावनापूर्ण बताया है।
ईडी और बचाव पक्ष के बीच तीखी बहस
सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि ट्रायल लगभग पूरा हो चुका है और सात समन जारी किए गए थे, लेकिन सोरेन एक बार भी पेश नहीं हुए। वहीं सोरेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दावा किया कि वे तीन बार पेश हुए थे और एजेंसी ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था। ईडी ने यह भी तर्क दिया कि याचिका मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने के करीब एक साल बाद दाखिल की गई है, इसलिए यह विलंबित है।
कोर्ट की सख्त मौखिक टिप्पणी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि एजेंसी को “बल्क शिकायतों” के बजाय ठोस मामलों पर ध्यान देना चाहिए ताकि रचनात्मक परिणाम सामने आ सकें। न्यायमूर्ति ने यह भी कहा कि एजेंसी को प्रभावी अभियोजन पर फोकस करना चाहिए।
हाईकोर्ट से पहले मिल चुका था झटका
इससे पहले 15 जनवरी को हाईकोर्ट ने ईडी की शिकायत पर विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान को रद्द करने से इनकार कर दिया था। ईडी ने आरोप लगाया है कि जमीन घोटाले से जुड़े मामले में जारी समन पर सोरेन पेश नहीं हुए थे। अब सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद मामले की दिशा पर सबकी नजरें टिकी हैं।
