Ranchi News : 22 जनवरी 2026 को सारंडा के घने जंगलों में हुई बड़ी मुठभेड़ ने नक्सल मोर्चे पर हालात बदल दिए। किरीबुरू थाना क्षेत्र में 209 कोबरा, झारखंड जगुआर, सीआरपीएफ और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने एक करोड़ के इनामी कमांडर अनल उर्फ पतिराम मांझी के दस्ते पर हमला बोला। सुबह करीब 6:30 बजे शुरू हुई मुठभेड़ में नक्सलियों ने फायरिंग की, लेकिन जवानों ने प्रभावी जवाब दिया। ऑपरेशन के बाद 17 नक्सलियों के शव और भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए। इस सफलता के बाद सुरक्षा बलों का मनोबल काफी बढ़ा है।
अब रसद और समर्थकों पर सीधा वार
एनकाउंटर के बाद झारखंड पुलिस ने रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब सिर्फ जंगलों में सर्च ऑपरेशन नहीं, बल्कि नक्सलियों को रसद पहुंचाने वाले समर्थकों पर भी कार्रवाई तेज कर दी गई है। “मैन-टू-मैन मार्किंग” के तहत हर इनामी नक्सली के संपर्कों की गुप्त निगरानी की जा रही है। अनाज, दवाइयां, कपड़े और अन्य सामग्री की सप्लाई पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। बंकरों में छिपाई गई सामग्री जब्त कर नष्ट की जा रही है।
कोल्हान में दो बड़े इनामी अब भी सक्रिय
कोल्हान क्षेत्र में पहले तीन एक करोड़ के इनामी कमांडर सक्रिय थे। 22 जनवरी की कार्रवाई में अनल मारा गया, लेकिन अब मिसिर बेसरा और असीम मंडल जैसे दो बड़े नाम अब भी फरार हैं। इनके साथ करीब 45 हार्डकोर कैडर सारंडा और आसपास के इलाकों में छिपे बताए जा रहे हैं। लगभग 15,000 जवानों की तैनाती के बीच इनकी घेराबंदी की जा रही है, जिससे किसी भी मूवमेंट की गुंजाइश कम हो गई है।
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आत्मसमर्पण का प्रस्ताव और डेडलाइन मार्च 2026
पुलिस ने नक्सलियों को आत्मसमर्पण का खुला प्रस्ताव दिया है। परिवारों से संपर्क कर उन्हें समझाया जा रहा है कि सरेंडर ही सुरक्षित रास्ता है। ग्रामीणों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है ताकि नक्सल सपोर्ट पूरी तरह खत्म हो सके। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण सफाए की डेडलाइन तय की है। अगर सारंडा फतेह होता है, तो इसे झारखंड से नक्सलवाद के अंत की निर्णायक शुरुआत माना जाएगा।

