Palamu News : झारखंड के पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में गौड़ यानी भारतीय बाइसन की घटती संख्या को लेकर वन विभाग अब गंभीर कदम उठा रहा है। 1970 के दशक में जहां पलामू के जंगलों में करीब 1500 गौड़ मौजूद थे, वहीं हालिया सर्वे (2024-25) में इनकी संख्या घटकर सिर्फ 68 रह गई है। इनमें 33 मादाएं, 25 नर और 10 बच्चे शामिल हैं। मानव दबाव, आवास क्षरण, अवैध शिकार और घरेलू पशुओं से फैलने वाली बीमारियां इसके मुख्य कारण माने जा रहे हैं।
सतपुड़ा से आएंगे 50 गौड़
वन विभाग ने मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 50 गौड़ों के ट्रांसलोकेशन की तैयारी शुरू कर दी है। यह योजना बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व मॉडल पर आधारित है, जहां कान्हा और सतपुड़ा से लाए गए गौड़ों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले चरण में 2-3 गौड़ लाकर उनके अनुकूलन का अध्ययन किया जाएगा। पूरी प्रक्रिया 2026 के अंत तक पूरी करने का लक्ष्य है। विशेष BOMA ट्रकों से सड़क मार्ग द्वारा 2-3 दिन में ट्रांसपोर्ट किया जाएगा।
जेनेटिक डाइवर्सिटी बढ़ाने की कोशिश
पीटीआर के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना के अनुसार, स्थानीय आबादी में आनुवंशिक सीमितता के कारण प्रजनन दर कमजोर हुई है। पिछले दो वर्षों से वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और पीटीआर की संयुक्त टीम ब्रीडिंग और व्यवहार पर अध्ययन कर रही थी। निष्कर्ष के बाद ही बाहर से गौड़ लाने का निर्णय लिया गया। राष्ट्रीय टाइगर संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और “गौड़ इंडिया” से चर्चा के बाद प्रोजेक्ट को हरी झंडी मिली।
छिपादोहर में बनेगा सॉफ्ट रिलीज सेंटर
पीटीआर के छिपादोहर क्षेत्र में विशेष सॉफ्ट रिलीज इनक्लोजर तैयार किया जा रहा है। यहां घास के मैदानों का विस्तार किया गया है और भोजन-पानी की पर्याप्त व्यवस्था होगी। गौड़ों को पहले इनक्लोजर में रखा जाएगा, फिर धीरे-धीरे जंगल में छोड़ा जाएगा ताकि वे नए वातावरण के अनुकूल हो सकें।
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5-7 साल में नई उम्मीद
इस पहल से उम्मीद है कि अगले 5-7 वर्षों में पलामू में गौड़ों की संख्या 100-120 तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे पारिस्थितिकी संतुलन मजबूत होगा और बेतला नेशनल पार्क क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को नई दिशा मिलेगी। बांधवगढ़ की सफलता इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए प्रेरणा स्रोत बनी हुई है।

