Chaibasa News:- पश्चिमी सिंहभूम जिले के अति नक्सल प्रभावित नोआमुंडी प्रखंड से मंगलवार रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जेटेया पंचायत अंतर्गत बाबरिया गांव में जंगली हाथी के तांडव ने पूरे इलाके को शोक और दहशत में डुबो दिया। एक ही रात में हाथी के हमले से छह लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक ही परिवार के पांच सदस्य शामिल हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बाबरिया गांव में जंगली हाथी ने देर रात अचानक एक घर पर हमला कर दिया। उस समय घर के सभी सदस्य गहरी नींद में सो रहे थे। हाथी ने घर को तोड़ते हुए अंदर घुसकर सनातन मेराल, उनकी पत्नी जोंकों कुई, उनके तीन मासूम बच्चों की जान ले ली। इस हमले में परिवार का केवल एक बच्चा किसी तरह बच पाया। एक ही घर में माता-पिता और बच्चों के शव मिलने से गांव में कोहराम मच गया और हर आंख नम हो गई।
इसी दौरान हाथी का आतंक बाबरिया गांव तक ही सीमित नहीं रहा। बड़ा पासीया गांव में भी एक ग्रामीण की हाथी के हमले में मौत हो गई, जबकि लांपाईसाई गांव में एक अन्य ग्रामीण को रौंदकर हाथी ने जान ले ली। इन दोनों गांवों में मृतकों की पहचान अभी नहीं हो पाई है। सभी घटनाएं रात के समय हुईं, जब ग्रामीण अपने घरों में सो रहे थे।
घटना के बाद इलाके में भय और आक्रोश का माहौल है। नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण बुधवार सुबह तक वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंच पाई थी और इस घटना की आधिकारिक पुष्टि भी देर तक नहीं हो सकी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बीते दस दिनों के भीतर कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में हाथी के हमलों से 20 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन और वन विभाग की ओर से न तो किसी आपात स्थिति की घोषणा की गई है और न ही हाथियों के आतंक से निपटने के लिए कोई ठोस रणनीति दिखाई दे रही है।
हाथी के लगातार हमलों से कोल्हान, सारंडा और आसपास के वनवर्ती गांवों में हालात बेहद भयावह हो गए हैं। कई गांवों के लोग रात होते ही अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं। बुंडू और आसपास के इलाकों से ग्रामीण जान बचाने के लिए रोवाम और अन्य सुरक्षित गांवों में पलायन कर रहे हैं। ठंड के इस मौसम में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को विवश हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से हाथी के आतंक से तत्काल राहत दिलाने, प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने और स्थायी समाधान की मांग की है।

