Patna News:- बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार बागी उम्मीदवार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। पिछले चुनाव में महज 0.3 प्रतिशत वोटों के अंतर से एनडीए को सत्ता मिली थी और महागठबंधन सत्ता से बाहर रह गया था। इस बार भी कई सीटों पर बागियों की उपस्थिति मुकाबले को दिलचस्प बना रही है।
राज्य की करीब 30 से अधिक सीटों पर बागी उम्मीदवार प्रमुख दलों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं। इनमें कुछ बागी खुद चुनाव मैदान में हैं, जबकि कई अपने दल के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ खुला विरोध कर रहे हैं।
सबसे ज्यादा परेशानी महागठबंधन को हो रही है, जिसमें राजद के बागियों की संख्या अधिक है। महागठबंधन की लगभग 11 सीटों पर ‘फ्रेंडली फाइट’ ने मुकाबले को जटिल बना दिया है। पिछले चुनाव में एनडीए ने 37.26 प्रतिशत वोट पाकर 125 सीटें जीती थीं, जबकि महागठबंधन को 37.23 प्रतिशत वोट के साथ 110 सीटें मिली थीं। ऐसे में इस बार बागियों द्वारा काटे गए वोट सत्ता का समीकरण बदल सकते हैं।
राजद ने 27 बागियों को निष्कासित किया है, जबकि जदयू ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल 11 नेताओं को बाहर कर दिया है।
मुख्य सीटों पर दिलचस्प मुकाबला:
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मधेपुरा में निर्दलीय प्रणव प्रकाश और अजय रंजन ने राजद-जदयू दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
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मुजफ्फरपुर में भाजपा के अजय निषाद के करीबी शंभू पटेल और कांग्रेस से नाराज अमरेश चौधरी निर्दलीय के रूप में मैदान में हैं।
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वैशाली में राजद-कांग्रेस उम्मीदवारों की आपसी लड़ाई के बीच विजय मंडल निर्दलीय के तौर पर सक्रिय हैं।
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सासाराम, कटिहार, सीवान और पटना सिटी में भी निर्दलीय प्रत्याशी दलों की नींद उड़ा रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि जिन सीटों पर बागी वोट काटेंगे, वहां मुख्य मुकाबला पूरी तरह पलट सकता है। यही बागी इस बार तय करेंगे कि सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा — एनडीए या महागठबंधन।

