Gopalganj News:- बिहार विधानसभा चुनाव-2025 के नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होते ही अब राजनीतिक दलों के भीतर असंतोष की आग भड़कने लगी है। गोपालगंज जिले की छह विधानसभा सीटों पर अब 46 प्रत्याशी चुनाव मैदान में रह गए हैं, लेकिन टिकट वितरण से असंतुष्ट नेताओं की नाराजगी ने तीनों प्रमुख दलों — राजद, भाजपा और कांग्रेस — की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
जिले के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों यह कहावत चर्चा में है — “मन मिले न मिले, हाथ मिलाते रहिए।” दरअसल, बाहर से एकजुटता का दिखावा करने वाले दलों में अंदर ही अंदर असंतोष की लहर जारी है। कई नेताओं ने पहले निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन कर पार्टी नेतृत्व को चुनौती दी, बाद में नामांकन वापस लेकर ऊपर से निष्ठा जताई, लेकिन अंदरखाने से अब भी पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ माहौल बना रहे हैं।
राजद में सबसे अधिक असंतोष देखने को मिल रहा है। पार्टी के पूर्व विधायक और कद्दावर नेता रेयाजुल हक राजू ने टिकट न मिलने पर खुलकर मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। उनका कहना है कि पार्टी ने अवास्तविक निर्णय लिया है, जबकि वे अपने जनाधार के बूते चुनाव लड़ेंगे। इससे राजद में दो खेमे बन गए हैं — एक पार्टी प्रत्याशी के साथ और दूसरा राजू के समर्थन में।
भाजपा में भी बगावत की लहर है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व जिला अध्यक्ष अनुपलाल श्रीवास्तव, जो चार दशकों से संगठन से जुड़े हैं, टिकट नहीं मिलने पर नाराज हैं और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में डटे हुए हैं। माना जा रहा है कि उनका यह कदम भाजपा उम्मीदवार की स्थिति को कमजोर कर सकता है।
कांग्रेस भी इससे अछूती नहीं है। टिकट वितरण में उपेक्षा से नाराज कई पुराने नेता अंदरखाने से विरोध की रणनीति अपना रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि टिकट से वंचित नेताओं का यह रवैया तीनों दलों की एकजुटता को प्रभावित कर सकता है।
जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि भले ही मंच पर सभी दल एकता का संदेश दे रहे हों, लेकिन अंदर से असहमति की चिंगारी इस चुनाव को और अधिक दिलचस्प बना रही है।

