बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद भी जहरीली शराब से होने वाली मौतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। विशेष रूप से सीमावर्ती जिलों में बढ़ती “हूच ट्रेजेडी” के मामलों ने मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है। अब विभाग स्प्रिट, इथेनॉल, मेथनॉल आदि पदार्थों की निगरानी के लिए विशेष रणनीति तैयार कर रहा है, ताकि शराबबंदी के नियमों को पूरी तरह से लागू किया जा सके और अवैध शराब की तस्करी पर रोक लगाई जा सके।
सीमाओं पर सख्त निगरानी, रूट की होगी समीक्षा
राज्य सरकार ने सीमावर्ती जिलों में आने वाले स्प्रिट-अल्कोहल लदे टैंकरों पर सख्त निगरानी का आदेश दिया है। इन टैंकरों के बिहार के विभिन्न जिलों से गुजरने के दौरान उनकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी। जीपीएस के जरिए इन गाड़ियों की पूरी यात्रा की निगरानी की जाएगी। अगर किसी गाड़ी का रुकने का समय 10 मिनट से ज्यादा होता है, तो उसका कारण जांचा जाएगा और तुरंत संबंधित जिले के एसपी और उत्पाद अधीक्षक को सूचित किया जाएगा। इसके अलावा, इन टैंकरों पर लगे डिजिटल लॉक की भी जांच होगी कि कहीं यह लॉक अवैध रूप से खुल तो नहीं रहा है।
28 हूच ट्रेजेडी घटनाएं, 300 से ज्यादा मौतें
मद्य निषेध विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2016 में शराबबंदी लागू होने के बाद से बिहार में जहरीली शराब के कारण मौतों की संख्या 300 से पार हो चुकी है। अब तक कुल 28 कांड सामने आ चुके हैं, जिनमें अधिकतर सीमावर्ती जिलों जैसे गोपालगंज, सारण, सिवान, और मोतिहारी में हुए हैं। इन जिलों में स्प्रिट, इथेनॉल, और मेथनॉल की तस्करी की उपलब्धता ने इन घटनाओं को बढ़ावा दिया है।
जहरीली शराब से मौतों का बढ़ता आंकड़ा
आखिरी बार अप्रैल 2023 में सिवान और पूर्वी चंपारण जिलों में जहरीली शराब से 51 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद लगभग डेढ़ साल तक कुछ राहत मिली थी, लेकिन हाल ही में फिर से जहरीली शराब के सेवन से मौतों की घटनाएं सामने आई हैं। विभाग अब सीमावर्ती जिलों पर फोकस कर अवैध शराब और स्प्रिट की तस्करी पर सख्त नियंत्रण लगाने की कोशिश कर रहा है।
शराबबंदी का लीकेज तलाशने की मुहिम
शराबबंदी के बाद भी शराब या स्प्रिट की अवैध तस्करी और उसकी वजह से होने वाली मौतें सरकार के लिए चुनौती बनी हुई हैं। अब मद्य निषेध विभाग ने शराबबंदी के नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए नए सिरे से समीक्षा शुरू की है। इसके तहत सीमावर्ती प्रदेशों से आने वाले स्प्रिट के रूट को पुनः जांचा जा रहा है और चेकपोस्टों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
क्या होंगी नई चुनौतियां?
हालांकि सरकार के प्रयासों के बावजूद अवैध शराब की तस्करी रोकने में चुनौतियां कम नहीं हुई हैं। सीमावर्ती इलाकों में तस्करों के लिए यह एक सुनहरा मौका बन जाता है, क्योंकि पड़ोसी राज्यों में शराबबंदी नहीं है, और वहां से अवैध शराब और स्प्रिट की आपूर्ति आसानी से हो जाती है। सरकार ने सख्त कार्रवाई की योजनाएं तैयार की हैं, लेकिन यह देखना होगा कि क्या ये कदम बिहार को जहरीली शराब से होने वाली मौतों से पूरी तरह बचा पाएंगे, या फिर तस्कर कोई और नया रास्ता तलाश लेंगे


