नई दिल्ली।
सीमा पर तनाव कम करने को लेकर शुक्रवार को भारत और चीन के बीच आठवें दौर की चली 10 घंटे की मैराथन वार्ता बिना किसी नतीजे के ही समाप्त हो गई। वार्ता के दौरान दोनों देशों के सैन्य कमांडर सीमा से पीछे हटने की शर्तों को लेकर अड़े रहे। भारत में एलओसी पर तनाव कम करने व पीछे हटने को लेकर दोनों देशों के बीच किसी ठोस रोड मैप पर सहमति नहीं बन पाई। हालांकि वार्ता के बारे में अब तक कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि चीन अभी भी पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी हिस्से में हिस्से में भारतीय सेना को ऊंचाई वाले जगह से हटाने की बात कररही है। वार्ता के दौरान भारत ने चीन के द्वारा उठाए गए पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे की अहम चोटियों पर भारतीय सैनिकों की तैनाती के मसले पर यह कह कर सिरे से खारिज कर दी गई कि एक पहाड़ियां भारतीय क्षेत्र में है। भारत ने एलओसी पार करके किसी पहाड़ी को अपने नियंत्रण में नहीं लिया है। भारत की तरफ से कहा गया कि डिसइंगेजमेंट होगा तो पूरी एलएसी पर होगा। ऐसी स्थिति में चीनी सेना को पैन्गोंग से उतरी किनारे पर फिंगर 4-8 के पीछे जाना पड़ता लेकिन चीनी सेना इसके लिए तैयार नहीं हुई थी। 12 अक्टूबर को सातवें दौर की हुई वार्ता में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच मास्को वार्ता में तय हुए 5 बिंदुओं के आधार पर एक दूसरे से रोडमैप मांगा गया था। वहीं शुक्रवार की बैठक में सौंपें गए रोडमैप पर दोनों देशों में सहमति नहीं बन पाई। वार्ता का आयोजन शुक्रवार को सुबह 9:30 बजे एलएसी के पास भारतीय क्षेत्र की सीमा में चुशूल में शुरू हुई। सेना की 14वीं कोर के नए कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन के नेतृत्व में सैन्य प्रतिनिधिमंडल के साथ शाम 7 बजे तक बैठक चली।


