Bhagalpur News:- भागलपुर जिले के शंकरपुर दियारा समेत आसपास के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के मोहताज बने हुए हैं। करीब 20 हजार की आबादी वाला यह इलाका शहर से बेहद करीब होने के बावजूद विकास से कोसों दूर है। यहां रहने वालों के लिए भागलपुर पहुंचने का एकमात्र साधन नाव है, जिससे रोजमर्रा के काम निपटाने से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक सब कुछ निर्भर है।
गंगा नदी के समानांतर बहने वाली धारा इस पूरे क्षेत्र को हर साल बाढ़ और कटाव की मार के बीच अलग-थलग कर देती है। बरसात के मौसम में यहां की समस्या और भी विकट हो जाती है। ग्रामीण बताते हैं कि नाव से सफर न तो सुरक्षित है और न ही नियमित। रात में आपातकालीन परिस्थिति आने पर नाव चालक नदी में उतरने से इंकार कर देते हैं, जिसके कारण कई लोगों की जान समय पर अस्पताल न पहुंच पाने से चली गई है।
स्थानीय सरपंच दिनेश का कहना है कि गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों के लिए यह स्थिति सबसे अधिक खतरनाक है। इलाज के अभाव में नहीं, बल्कि नाव नहीं मिलने की वजह से कई लोगों ने दम तोड़ा है।
इस क्षेत्र में एकमात्र सहारा चचरी पुल हुआ करता था, जिसे ग्रामीण हर साल चंदा इकट्ठा कर बनाते थे। लेकिन वर्ष 2025 में पर्याप्त राशि न जुट पाने के कारण अब तक पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। इसके चलते स्कूली बच्चों को सुबह-सुबह नाव की कतार में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, वहीं महिलाएं जरूरतों के लिए नदी पार करने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिला प्रशासन ने इस क्षेत्र में पक्का पुल बनाने का आश्वासन दिए काफी समय बीत चुका है, पर अब तक न तो निर्माण कार्य शुरू हुआ और न ही कोई ठोस कदम उठाया गया। हर दिन लगभग पांच हजार लोग जोखिम भरी नाव पर जीवन बिताने को विवश हैं।
लोगों ने जिला प्रशासन और नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों से स्थायी पुल निर्माण की दिशा में जल्द से जल्द पहल करने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अनहोनी से बचा जा सके और दियारा की इस बड़ी समस्या का स्थायी समाधान निकल सके।

