Ranchi News:- झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों अपने पैतृक गांव नेमरा में हैं, जहां वे अपने दिवंगत पिता और झारखंड आंदोलन के प्रणेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन का श्राद्धकर्म कर रहे हैं। सादगीपूर्ण अंदाज में गांव की गलियों और पगडंडियों पर घूमते हुए मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों से मुलाकात की, उनकी समस्याएं सुनीं और सुझाव भी लिए।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया कि नेमरा की पगडंडियों पर किसानों से मिलते और जल-जंगल-ज़मीन के मुद्दों पर चर्चा करते हुए हेमंत सोरेन में उनके पिता की विरासत स्पष्ट झलकती है। यह संबंध सिर्फ खून का नहीं, बल्कि विचारों, सिद्धांतों और जनसेवा के संकल्प का है। प्रकृति प्रेम उनके व्यक्तित्व और नीतियों में साफ दिखाई देता है।
विज्ञप्ति में कहा गया कि हेमंत सोरेन सिर्फ राज्य के मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि शिबू सोरेन की परछाई के रूप में देखे जाते हैं। गरीब और वंचितों की समस्याओं को सुनना, ग्रामीण विकास के लिए काम करना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना उनके काम की प्राथमिकता में है। यह वही जनसेवा की परंपरा है जिसे गुरुजी ने दशकों तक निभाया और लोगों के दिलों में अमर हो गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके जीवन का हर कदम पिता की सीख और आशीर्वाद से प्रेरित है। “गुरुजी ने सिखाया कि राजनीति का मतलब सत्ता नहीं, बल्कि जनता की सेवा और उनके अधिकारों की रक्षा है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि गांव का विकास राज्य के विकास की असली नींव है और जल, जंगल, ज़मीन राज्य की पहचान और अस्तित्व का आधार हैं।
सरकार जल संरक्षण, वन संरक्षण और भूमि अधिकार सुनिश्चित करने के लिए योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर लागू कर रही है। मुख्यमंत्री का मानना है कि जल, जंगल और ज़मीन केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि झारखंड की आत्मा हैं, जो लोकगीतों, त्योहारों और परंपराओं में रचे-बसे हैं। इसलिए, इनके संरक्षण को सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
बुधवार को श्राद्धकर्म के नौवें दिन मुख्यमंत्री ने परिजनों संग पारंपरिक विधान पूरा कर अपने पिता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

