उत्तरवाहिनी गंगा से जुड़ा अजगैबीनाथ धाम, सावन में उमड़ता सैलाब
Bhagalpur News: भागलपुर जिले के सुलतानगंज में उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर स्थित बाबा अजगैबीनाथ धाम धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी प्राचीन परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए भी जाना जाता है। विशाल ग्रेनाइट की चट्टान पर विराजमान बाबा अजगैबीनाथ के दर्शन के लिए सावन के महीने में देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालु और कांवड़िए यहां पहुंचते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करने से पहले सुलतानगंज के बाबा अजगैबीनाथ को गंगाजल चढ़ाना जरूरी है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरते हैं और करीब 100 किलोमीटर की पैदल कांवड़ यात्रा कर देवघर पहुंचते हैं। सावन के दौरान पूरा सुलतानगंज बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठता है।
महंतों के देवघर नहीं जाने की मान्यता
अजगैबीनाथ धाम से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यताओं में यहां के महंतों का देवघर नहीं जाना शामिल है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, यदि इस मठ का कोई महंत देवघर जाने का प्रयास करता है तो उसकी आंखों की रोशनी प्रभावित होने लगती है। वर्तमान महंत प्रेमानंद गिरि के अनुसार, उन्होंने भी एक बार देवघर जाने की कोशिश की थी। उनका दावा है कि इसके बाद उनकी आंखों की रोशनी कम होने लगी, जिसके बाद उन्होंने देवघर जाने का विचार छोड़ दिया।
मठ का इतिहास हजारों वर्ष पुराना बताया जाता है। अब तक यहां 18 महंत हो चुके हैं और इस परंपरा को आज भी निभाया जा रहा है।
भगवान शिव से जुड़ी है प्राचीन कथा
अजगैबीनाथ धाम की एक प्राचीन कथा के अनुसार, मठ के प्रथम महंत सिद्धार्थ नाथ भारती और केदारनाथ प्रतिदिन उत्तरवाहिनी गंगा से जल लेकर पैदल देवघर जाया करते थे। एक दिन भगवान शिव ब्राह्मण का रूप धारण कर दोनों महंतों के साथ यात्रा पर निकल पड़े।
कहा जाता है कि रास्ते में भगवान शिव ने उन्हें अपने वास्तविक स्वरूप का दर्शन कराया। भगवान के साक्षात दर्शन से अभिभूत दोनों महंतों ने उनके चरणों में ही स्थान पाने की इच्छा जताई। इसी मान्यता के प्रतीक के रूप में आज भी मुख्य शिवलिंग के पास दो अन्य शिवलिंग स्थापित हैं।
पूजा की परंपरा भी है अलग
अजगैबीनाथ मंदिर की पूजा पद्धति भी विशेष मानी जाती है। यहां सुबह सबसे पहले बाबा बैद्यनाथ के नाम से पूजा की जाती है। इसके बाद सरकारी पूजा संपन्न होने पर बाबा अजगैबीनाथ की मुख्य पूजा शुरू होती है।
सावन में लाखों कांवड़ियों की आस्था, उत्तरवाहिनी गंगा और सदियों पुरानी धार्मिक मान्यताएं अजगैबीनाथ धाम को बिहार के प्रमुख शिव तीर्थों में खास स्थान देती हैं।


