Ranchi News:- खूंटी में पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के विरोध में शनिवार को राजधानी रांची में आदिवासी संगठनों ने व्यापक बंद का आह्वान किया। बंद का राजधानी में व्यापक असर देखने को मिला। अधिकांश व्यापारिक प्रतिष्ठान, शैक्षणिक संस्थान और निजी कार्यालय बंद रहे, जबकि सड़कों पर आदिवासी समाज का विशाल हुजूम उतर आया।
आदिवासी समाज के लोग पारंपरिक डेलपासा और हरवे हथियारों के साथ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए अल्बर्ट एक्का चौक से शहर के विभिन्न हिस्सों में मार्च करते नजर आए। प्रदर्शनकारियों ने झारखंड बंद को सफल बनाने का दावा किया।
रांची बंद की अगुवाई केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने की। उन्होंने सरकार से सोमा मुंडा हत्याकांड के आरोपितों की अविलंब गिरफ्तारी और उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की। साथ ही इस हत्याकांड की सीबीआई जांच कराने की भी मांग उठाई गई।
बबलू मुंडा ने कहा कि आदिवासियों के हितों की रक्षा का दावा करने वाली हेमंत सोरेन सरकार पूरी तरह विफल साबित हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और प्रशासन मूकदर्शक बने हुए हैं, जबकि लगातार आदिवासी समाज के नेताओं और युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोमा मुंडा के अलावा समाजसेवी सुभाष मुंडा, रूपा तिर्की, अनिल टाइगर, विजय मुंडू, जीतराम मुंडा, सूर्या हांसदा, संध्या टोपनो और तारापद महतो जैसे कई मामलों में आज तक न्याय नहीं मिल सका है।
उन्होंने सवाल उठाया कि धुर्वा क्षेत्र में बच्चों की गुमशुदगी पर प्रशासन तुरंत सक्रिय हो जाता है, लेकिन राज्य के मालिक कहे जाने वाले पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के मामले में सरकार लीपापोती में लगी हुई है।
झारखंड बंद को सफल बनाने में चडरी सरना समिति के महासचिव सुरेंद्र लिंडा, केंद्रीय सरना समिति के महासचिव महादेव टोप्पो, झारखंड आंदोलनकारी कुमुद वर्मा, एदलहातु सरना समिति महासचिव मुकेश मुंडा, आयोजक संतोष मुंडा, आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की सहित बड़ी संख्या में आदिवासी नेता, युवा और समाजसेवी शामिल हुए।
बंद और प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस-प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

