Patna News:- बिहार विधानसभा चुनाव में जनसुराज को मिली करारी हार के बाद प्रशांत किशोर ने मंगलवार को चुनावी नतीजों की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए कहा कि उन्होंने जनता से किए गए बदलाव के वादे को पूरा नहीं कर पाए, जिसके लिए वह नैतिक रूप से प्रायश्चित करेंगे। उन्होंने घोषणा की कि वह महात्मा गांधी के ऐतिहासिक भीतहरवा आश्रम में एक दिवसीय उपवास रखेंगे।
पीके ने कहा कि हार के बावजूद उनकी नीयत और प्रयासों पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “गलती जरूर हुई होगी, लेकिन कोई गुनाह नहीं किया। हमने न जाति की राजनीति की, न हिंदू-मुस्लिम का कार्ड खेला और न ही गरीबों को बहकाकर वोट लेने की कोशिश की। दूसरों ने यह किया है, हमने नहीं।”
उन्होंने कहा कि बिहार में व्यवस्था परिवर्तन का जो सपना उन्होंने जनता के सामने रखा था, उसे पाने में वह अभी सफल नहीं हो सके, लेकिन संघर्ष जारी रहेगा। प्रशांत किशोर ने भावुक होते हुए कहा कि “जब तक आप छोड़ते नहीं, तब तक आप हारते नहीं।” उन्होंने भरोसा दिलाया कि बिहार को सुधारने के अपने संकल्प से वे पीछे नहीं हटेंगे।
पीके ने नई सरकार को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि चुनाव से पहले योजनाओं के तहत पैसे बांटकर वोट लेने की प्रवृत्ति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले दी गई योजनाओं की रकम की अगली किश्त छह महीने के भीतर जारी की जानी चाहिए, ताकि जनता को धोखा न मिले।
जदयू की सीटों पर अपनी भविष्यवाणी का उल्लेख करते हुए उन्होंने दोहराया कि पार्टी 25 सीटें पार नहीं करेगी—और चुनाव परिणामों ने इसे लगभग साबित भी किया। उन्होंने कहा कि तीन साल तक गांव-गांव घूमकर जो आकलन किया था, उसके आधार पर नीतीश कुमार को इतने वोट नहीं मिलने चाहिए थे, परन्तु सरकारी धन के वितरण ने समीकरण बदल दिए।
अंत में उन्होंने कहा कि चुनावी नतीजे भले निराशाजनक हों, लेकिन बदलाव की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

