Bokaro News: जिले के गोमिया के विभिन्न स्थानों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शनिवार को नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एनआईए की आठ टीमों ने सुबह छह बजे से नक्सल प्रभावित गोमिया के विभिन्न इलाकों में लगभग तीन से चार घण्टे तक छापेमारी की। यह छापेमारी झुमरा पहाड़ और उसके आसपास के गांव चतरो चट्टी, रजडेरबा, लोधी, चेयाटांड, कुरकुटिया, धमधरवा,तूईयो और हरयीदमो में हुई।

बोकारो पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी ने पुष्टि की है कि एनआईए को नक्सलियों और उनके नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई है। छापेमारी के दौरान टीम कई दस्तावेजों को साथ लेकर गई है, जो नक्सली संगठन की गतिविधियों और उनके संबंधों को उजागर करने में मदद कर सकते हैं।
एनआईए की यह कार्रवाई झारखंड में नक्सलियों के खिलाफ नए साल की सबसे बड़ी जांच मानी जा रही है। टीम का मुख्य उद्देश्य नक्सलियों के नेटवर्क को ध्वस्त करना और उनके आर्थिक व संगठनात्मक आधार को कमजोर करना है। छापेमारी से जुड़े इलाके लंबे समय से नक्सली प्रभाव में रहे हैं, जिससे यह जांच और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।एनआईए की इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस ने भी सक्रियता बढ़ा दी है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने झारखंड में भाकपा माओवादियों के षड्यंत्र मामले में एक मुख्य आरोपित को गिरफ्तार किया है।
एनआईए से आधिकारिक रूप से मिली जानकारी के अनुसार, झारखंड के बोकारो जिले के गोविंदपुर निवासी बच्चा सिंह उर्फ बच्चा बाबू सिंह को एनआईए ने गिरफ्तार किया है। वह (आरसी-03/2023/एनआईए/आरएनसी) मामले में एफआईआर में आरोपित है।
एनआईए ने अगस्त 2023 में यूए(पी) अधिनियम और सीएलए अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आनंदपुर पुलिस से मामला अपने हाथ में लिया था। जांच के दौरान पता चला कि बच्चा सिंह मजदूर संगठन समिति (एमएसएस) का सचिव था, जिसे वर्तमान में झारखंड राज्य सरकार ने सीएलए अधिनियम के तहत प्रतिबंधित कर दिया है। आरोपित प्रतिबंधित भाकपा माओवादी और उसके शीर्ष नेताओं के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ था। वह संगठन की विचारधारा को बढ़ावा देने और झारखंड और अन्य स्थानों में इसकी गतिविधियों को मजबूत करने के लिए धन संग्रह में शामिल था।
यह मामला मूल रूप से जुलाई 2022 में झारखंड के चाईबासा जिले में तीन भाकपा माओवादी कैडरों की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज किया गया था, जब वे माओवादी लाजिम अंसारी और सौरभ के जरिये लिखे गए पत्र देने के लिए सीपीआई (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा से मिलने जा रहे थे। मामले में आगे की जांच जारी है।