Ranchi News:- चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र के एक 19 वर्षीय मैट्रिक छात्र को कथित रूप से 10 दिनों तक अवैध हिरासत में रखने के मामले में सोमवार को झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए चतरा के पुलिस अधीक्षक सुमित अग्रवाल व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए और केस डायरी प्रस्तुत की। अदालत ने अगली सुनवाई 27 फरवरी को निर्धारित करते हुए एसपी को पुनः हाजिर रहने और विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति ए.के. राय की खंडपीठ ने एसपी से स्पष्ट जवाब मांगा कि छात्र को 10 दिनों तक हिरासत में क्यों रखा गया और 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश क्यों नहीं किया गया। अदालत ने यह भी पूछा कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई है तथा छात्र की मैट्रिक परीक्षा छूटने के लिए जिम्मेदार कौन है।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस को आम जनता के बीच अपनी छवि सुधारने की आवश्यकता है। अदालत ने कहा कि पुलिस का दायित्व नागरिकों को सुरक्षा देना है, न कि उन्हें अनावश्यक प्रताड़ित करना। यदि छात्र को पूछताछ के बाद छोड़ दिया जाता तो समाज में सकारात्मक संदेश जाता। यदि वह दोषी पाया जाता तो विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता था, लेकिन बिना स्पष्ट कारण 10 दिन तक हिरासत में रखना कानून के अनुरूप प्रतीत नहीं होता।
अदालत ने केस डायरी के अवलोकन के बाद पाया कि 31 जनवरी को छात्र के संबंध में उल्लेख है, लेकिन उससे पहले या बाद की हिरासत का स्पष्ट विवरण दर्ज नहीं है। इस पर अदालत ने नाराजगी जाहिर की। सुनवाई के दौरान चतरा एसपी के अलावा चतरा डीएसपी, लावालौंग और टंडवा थाना प्रभारी भी अदालत में मौजूद रहे।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता भास्कर त्रिवेदी ने पक्ष रखते हुए बताया कि रंगदारी के एक मामले में मोबाइल को संदिग्ध बताते हुए 26 जनवरी की रात छात्र को घर से उठाया गया। पूछताछ के बाद भी उसे नहीं छोड़ा गया और बाद में टंडवा थाना पुलिस को सौंप दिया गया। आरोप है कि छात्र को 10 दिनों तक अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। उच्च न्यायालय में हेबियस कॉर्पस याचिका दायर किए जाने के बाद छात्र को घर पहुंचाया गया।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी घर के आसपास तैनात हैं और मामला वापस लेने का दबाव बना रहे हैं। मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को होगी, जिसमें अदालत विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।

