Jharkhand News: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा पूरी तरह सदन पर हावी रहा। विपक्ष के जोरदार विरोध, नारेबाजी और वेल में पहुंचकर प्रदर्शन करने के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। लगातार हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने पहले कार्यवाही दोपहर 12:30 बजे तक स्थगित की और बाद में सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित करने की घोषणा कर दी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के विधायक हाथों में तख्तियां लेकर विधानसभा परिसर के बाहर पहुंचे। उन्होंने सरकार पर राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। विधायकों ने कहा कि जेपीएससी-जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने में गंभीरता नहीं दिखा रही है।
विपक्षी विधायकों ने कहा कि छात्रों की जायज मांगें ही विपक्ष की भी मांगें हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में केवल पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि नौकरियों और प्रश्नपत्रों की कथित खरीद-फरोख्त तक की स्थिति बन गई है। विपक्ष ने सरकार से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
प्रदर्शन के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मीडिया से बातचीत में राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद से लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कौन-सी नौकरी कितने रुपये में बिक रही है, इसकी चर्चा अब आम लोगों के बीच भी होने लगी है।
मरांडी ने कहा कि राज्य के युवा रोजगार की उम्मीद में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के कारण उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले में जवाब देने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और कथित भर्ती अनियमितताओं के मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बात करनी चाहिए। मरांडी ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री उनकी बात नहीं सुनते हैं, तो कांग्रेस को ऐसी कथित भ्रष्ट सरकार से तत्काल अलग हो जाना चाहिए।
कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य के हजारों छात्र और युवा बारिश के बीच सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर हैं। उनका आरोप था कि झारखंड गठन के बाद आयोजित कई जेपीएससी परीक्षाओं पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं और जेएसएससी की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में भी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं।
मरांडी ने सरकार से मांग की कि जेपीएससी और जेएसएससी की सभी विवादित परीक्षाओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराई जाए, ताकि छात्रों का भरोसा बहाल हो सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि अनुपूरक बजट पेश होने के बाद इस विषय पर विस्तार से चर्चा के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध रहेगा। वहीं कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने कहा कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है और उनकी मांगों के साथ खड़ी है।
सरकारी जवाब के बीच विपक्षी विधायक वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने कई बार सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और प्रश्नकाल चलने देने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि खेती-किसानी से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय भी सदन में चर्चा की प्रतीक्षा कर रहे हैं, इसलिए कार्यवाही बाधित नहीं होनी चाहिए। इसके बावजूद विपक्ष का विरोध जारी रहा, जिसके बाद सदन की कार्यवाही पहली बार दोपहर 12:30 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
दोपहर में कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने विपक्ष के विरोध को अनावश्यक बताते हुए कहा कि सरकार छात्रों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध है, जबकि विपक्ष इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। इसी दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने शून्यकाल की सभी सूचनाओं को पढ़ा हुआ मानते हुए संबंधित विभागों को भेजने का निर्देश दिया।
हालांकि विपक्षी सदस्य एक बार फिर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। लगातार जारी हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष ने अंततः सदन की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।


