Jharkhand News: झारखंड हाई कोर्ट की सख्ती के बाद बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) के बंद प्रवेश द्वारों को खुलवाने और संयंत्र में कामकाज सामान्य करने की दिशा में प्रशासन ने कार्रवाई की है। विस्थापित अप्रेंटिस संघ के आंदोलन के कारण प्लांट के सभी प्रमुख गेट जाम हो गए थे, जिससे कर्मचारियों की आवाजाही और उत्पादन गतिविधियां प्रभावित हुई थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने रविवार को विशेष सुनवाई करते हुए बोकारो के उपायुक्त को तत्काल आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट ने डीसी से किया जवाब तलब
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने बोकारो स्टील प्लांट के प्रवेश द्वार बंद होने और कामकाज प्रभावित होने पर नाराजगी जताई। अदालत ने बोकारो के उपायुक्त को सभी गेट खुलवाने तथा कर्मचारियों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सुनवाई के दौरान उपायुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए।

स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
नियोजन की मांग को लेकर आठ दिनों से आंदोलन
दरअसल, विस्थापित अप्रेंटिस संघ अपनी विभिन्न मांगों, विशेषकर नियोजन की मांग को लेकर पिछले आठ दिनों से भूख हड़ताल कर रहा था। शनिवार को आंदोलन ने गंभीर रूप ले लिया, जब प्रदर्शनकारियों ने बोकारो स्टील प्लांट के मुख्य द्वार सहित सभी प्रमुख प्रवेश द्वारों को जाम कर दिया।
गेट बंद होने के कारण स्थायी और ठेका कर्मचारियों को प्लांट के भीतर जाने में परेशानी हुई। इस दौरान करीब 3,000 कर्मचारियों के संयंत्र के अंदर फंसे होने की सूचना सामने आई।
उत्पादन और माल ढुलाई पर पड़ा असर
प्रवेश द्वारों के अवरुद्ध होने से प्लांट की गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुईं। कर्मचारियों की आवाजाही बाधित होने के साथ उत्पादन और माल की ढुलाई भी ठप हो गई थी। इससे संयंत्र के संचालन को लेकर गंभीर स्थिति पैदा हो गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने रविवार को विशेष सुनवाई कर जिला प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया। अदालत की सख्ती के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ और बंद गेट खुलवाने की कार्रवाई की गई।
28 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
बोकारो स्टील प्लांट झारखंड के प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों में शामिल है। ऐसे में संयंत्र का कामकाज प्रभावित होने से जुड़े मामले पर अदालत ने गंभीरता दिखाई है। अब सभी की नजर 28 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर है, जिसमें मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
फिलहाल आंदोलनकारियों की मांगों और संयंत्र का कामकाज सुचारु बनाए रखने के बीच प्रशासन के सामने संतुलन कायम रखने की चुनौती है।


