Health : आज की मॉडर्न लाइफस्टाइल में 10 हजार कदम चलना एक बड़ा फिटनेस गोल बन चुका है. लोग स्मार्ट वॉच और फिटनेस बैंड के जरिए इसे ट्रैक करते हैं. लेकिन इसकी शुरुआत किसी मेडिकल गाइडलाइन से नहीं, बल्कि 1960 के दशक में जापान में एक पेडोमीटर “मानपो-केई” से हुई थी. इसे मार्केटिंग टूल के तौर पर पेश किया गया, जिसका मतलब ही था “10,000 स्टेप मीटर”. धीरे-धीरे ये पूरी दुनिया में फिटनेस स्टैंडर्ड बन गया, जबकि इसके पीछे कोई सख्त वैज्ञानिक नियम नहीं था.
हर किसी के लिए 10 हजार कदम जरूरी नहीं
सोशल मीडिया पर लोग इसे आंख बंद करके फॉलो करने लगते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे एक बड़ा मिथक मानते हैं. हर इंसान की उम्र, वजन, फिटनेस लेवल और हेल्थ कंडीशन अलग होती है. बुजुर्गों के लिए 5-7 हजार कदम काफी हो सकते हैं, जबकि जो लोग बिल्कुल एक्टिव नहीं हैं, उन्हें 3-4 हजार कदम से शुरुआत करनी चाहिए. शुरुआत में ही 10 हजार कदम चलना शरीर पर अनावश्यक दबाव डाल सकता है.
क्या सिर्फ वॉक करना ही काफी है?
कई लोग मान लेते हैं कि अगर उन्होंने 10 हजार कदम पूरे कर लिए, तो उन्हें एक्सरसाइज की जरूरत नहीं. लेकिन फिटनेस सिर्फ वॉकिंग तक सीमित नहीं है. मसल्स मजबूत करने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, दिल और फेफड़ों के लिए कार्डियो और बॉडी की फ्लेक्सिबिलिटी के लिए योग या स्ट्रेचिंग भी जरूरी है. यानी वॉकिंग फिटनेस का एक हिस्सा है, पूरा समाधान नहीं.
ज्यादा कदम = ज्यादा फायदा? सच क्या है
कुछ लोग 10 हजार से आगे बढ़कर 15-20 हजार कदम तक चलने लगते हैं, यह सोचकर कि ज्यादा चलने से ज्यादा फायदा मिलेगा. लेकिन एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि जरूरत से ज्यादा कोई भी चीज नुकसानदेह हो सकती है. ओवरवॉकिंग से जोड़ों में दर्द, थकान और इंजरी का खतरा बढ़ सकता है.
फिटनेस में डाइट और लाइफस्टाइल भी जरूरी
सीनियर डाइटिशियन के मुताबिक, सिर्फ स्टेप काउंट पर ध्यान देना सही नहीं है. सही डाइट, पर्याप्त नींद, हाइड्रेशन और स्ट्रेस मैनेजमेंट भी उतने ही जरूरी हैं. संतुलित जीवनशैली के बिना सिर्फ चलना आपको पूरी तरह फिट नहीं बना सकता. इसलिए फिटनेस को एक होलिस्टिक अप्रोच के साथ अपनाना ही असली स्मार्ट मूव है.

