मां दक्षिणेश्वरी चामुंडा का सिद्धपीठ, सोने-चांदी के नेत्र चढ़ाने की अनोखी परंपरा
लेंबोइया पहाड़ी मंदिर का इतिहास, रहस्य और आस्था से जुड़ी मान्यताएं
Chatra News: शारदीय नवरात्र को लेकर पूरे देश में मां दुर्गा की पूजा की धूम मची हुई है। झारखंड के चतरा जिले का प्रसिद्ध धार्मिक स्थल लेंबोइया पहाड़ी मंदिर भी इन दिनों भक्तों की भीड़ से गुलजार है। यहां मां भगवती दक्षिणेश्वरी चामुंडा स्वरूप में विराजमान हैं। इस मंदिर को सिद्धपीठ माना जाता है और मान्यता है कि यहीं माता सती के वाम नेत्र की पलकें गिरी थीं।
मंदिर प्रबंधन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष युगेश्वर प्रसाद ने बताया कि सदियों से यहां भक्त अपनी मन्नतें पूरी होने पर सोने और चांदी के नेत्र चढ़ाते हैं। यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। नवरात्र के अवसर पर दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मंदिर के सचिव बासुदेव तिवारी ने बताया कि प्राचीन काल में यह स्थान तांत्रिक क्रियाओं के लिए भी प्रसिद्ध था। पहाड़ी की चोटी पर स्थापित मां की दुर्लभ प्रतिमा काले पत्थरों से निर्मित है। प्रतिमा में मां भगवती तीन मस्तक और सात नेत्रों के साथ प्रचंड मुद्रा में दिखाई देती हैं। उनके पैरों के नीचे चंड और मुंड की प्रतिमाएं बनी हुई हैं। खास बात यह है कि पूजा पूरी तरह वैष्णव परंपरा से की जाती है और सुबह से शाम तक भक्तजन मां की आराधना में लीन रहते हैं।
कोषाध्यक्ष उदयनाथ सिंह, केदार राम दांगी और बालेश्वर दांगी ने बताया कि मां की प्रतिमा आठवीं से दसवीं शताब्दी की बताई जाती है। कहा जाता है कि इस मंदिर की खोज चरवाहों ने की थी। बाद में ग्रामीणों और प्रबंधन समिति की मदद से यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर की अद्भुत प्रतिमा कई बार चोरी की कोशिशों के बावजूद आज तक सुरक्षित है, जिसे भक्त मां की चमत्कारिक शक्ति मानते हैं।
इतिहासकारों के अनुसार, लेंबोइया पहाड़ी में नवरात्र पर्व सदियों से मनाया जाता रहा है। कभी रामगढ़ राजपरिवार यहां पूजा करवाता था और पदमा के राजा कामख्या नारायण सिंह के नाम से प्रथम भोग और बली चढ़ाने की परंपरा चली आ रही थी। ब्रह्म ऋषि समाज के लोग मां को अपनी कुलदेवी मानकर पूजा करते हैं। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि हर शुभ कार्य की शुरुआत इसी मंदिर से की जानी चाहिए।
प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह मंदिर श्रद्धा, परंपरा और रहस्य का अनूठा संगम है। मुख्य मंदिर में मां भगवती की पांच फीट ऊंची प्रतिमा के साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। मंदिर का उल्लेख अंतिम सर्वे खतियान में भी दर्ज है।
यह मंदिर चतरा प्रखंड मुख्यालय से महज एक किलोमीटर पूर्व में पत्थलगड-हजारीबाग मुख्य मार्ग के किनारे स्थित है। सड़क मार्ग से यह हजारीबाग, चतरा और सिमरिया अनुमंडल से जुड़ा है। जबकि निकटतम रेलवे स्टेशन कटकमसांडी और हजारीबाग टाउन हैं।

