Rudraprayg News:- पौराणिक रीति-रिवाज और धार्मिक परंपराओं के अनुसार बाबा केदार की चल उत्सव डोली गुरुवार सुबह केदारनाथ धाम से शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान कर गई। भैयादूज के पावन पर्व पर सुबह 08:30 बजे सेना के बैंड की भक्ति धुन और जयकारों के बीच यह विशेष धार्मिक आयोजन हुआ।
इस अवसर पर 10 हजार से अधिक शिवभक्तों ने बाबा केदार के दर्शन किए। डोली पहले रामपुर में रात्रि प्रवास के लिए रुकेगी। 25 अक्टूबर को पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में बाबा केदार विराजमान होंगे और अगले छह माह तक श्रद्धालु यहीं उनकी पूजा-अर्चना कर सकेंगे।
गुरुवार सुबह 4 बजे से केदारनाथ धाम में मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए। मुख्य पुजारी बागेश लिंग ने बाबा केदारनाथ के स्वयंभू लिंग का पुष्प-अक्षत और भस्म से श्रृंगार कर समाधि रूप दिया। परंपराओं के अनुसार भोग अर्पित किया गया और पूजा-अर्चना पूरी विधि से संपन्न हुई।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के विज़न के अनुरूप धाम का भव्य निर्माण हुआ है और इस वर्ष चारधाम यात्रा में रिकार्ड 50 लाख श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित करने की बात कही।
बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि कपाट बंद होने तक 17,68,795 तीर्थयात्रियों ने बाबा केदारनाथ के दर्शन किए। बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि बाबा केदार की पंचमुखी देव डोली रामपुर से रात्रि विश्राम के लिए विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी पहुंचेगी और 25 अक्टूबर को ऊखीमठ में छह माह की शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए विराजमान होगी।
इस भव्य धार्मिक आयोजन ने हजारों श्रद्धालुओं को अपने आराध्य के निकट लाकर आस्था और श्रद्धा का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।

