Jharkhand News : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। बीमारी के कारण अब तक तीन बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि शनिवार को 16 नए संक्रमित मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। प्रभावित गांवों और छात्रावासों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाकर जांच, उपचार, दवा वितरण और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
शनिवार को पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में लगातार तीसरे दिन विशेष जांच अभियान चलाया गया। जांच के दौरान 14 लोगों में ब्रेन मलेरिया की पुष्टि हुई। इनमें से सात मरीजों की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल और सदर अस्पताल रेफर किया गया। वहीं गोमियासाई की 12 वर्षीय अमीषा भूमिज और सेरेंगडीह के 17 वर्षीय भीम सरदार भी संक्रमित पाए गए हैं, जिनका इलाज हाता स्थित तारा सेवा सदन में जारी है। इस तरह शनिवार को कुल 16 नए मरीजों की पुष्टि हुई।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, संक्रमण का सबसे अधिक असर बच्चों और किशोरों पर देखने को मिल रहा है। संक्रमितों में कई स्कूली छात्र-छात्राएं भी शामिल हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में चिंता का माहौल बना हुआ है।
इसी बीच कोंडोर गांव की सुबोला सरदार की ब्रेन मलेरिया से मौत हो गई। उनकी एक वर्षीय बहन खुशबू सरदार भी इसी बीमारी से संक्रमित है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। चिकित्सकों के अनुसार बच्ची का इलाज जारी है। मृतका के पिता महावीर सरदार ने बताया कि शुरुआत में बच्ची का इलाज झोलाछाप चिकित्सक से कराया गया था, लेकिन हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाने तक काफी देर हो चुकी थी।
सीएचसी पोटका की प्रभारी डॉ. रजनी महाकुड़ ने बताया कि अब तक कस्तूरबा विद्यालय की छात्रा लखी सरदार, दौड़डोडिया गांव के राहुल सरदार और कोंडोर गांव की सुबोला सरदार की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित गांवों में घर-घर जाकर जांच कर रही हैं और लोगों को मलेरिया से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।
जिला मलेरिया पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल अधिकारी ने भी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया तथा स्वास्थ्यकर्मियों को उपचार और रोकथाम के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, कमजोरी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत सरकारी अस्पताल में जांच कराने तथा झोलाछाप चिकित्सकों से इलाज कराने से बचने की अपील की है।


