Araia News;-बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के तहत अररिया जिले की छह विधानसभा सीटों पर 11 नवंबर को मतदान होना है। नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राजनीतिक माहौल गर्म है। प्रत्याशी और उनके समर्थक जनसंपर्क अभियान में पूरी ताकत झोंक चुके हैं।
इन दिनों जिले में चुनाव प्रचार का एक नया स्वरूप देखने को मिल रहा है — जाति, धर्म और मजहब की दीवारें टूटती दिख रही हैं। प्रत्याशी हर वर्ग और समुदाय के लोगों तक पहुंच रहे हैं। दीपावली, काली पूजा, गोवर्धन पूजा और आगामी छठ पर्व के बीच चुनावी माहौल में भी धार्मिक एकता और सौहार्द की खुशबू फैल रही है।
मुस्लिम प्रत्याशी हिंदू पर्वों में शामिल हो रहे हैं तो हिंदू प्रत्याशी इबादत और जनाजे में शरीक होकर भाईचारे का संदेश दे रहे हैं। यह चुनाव प्रचार अब केवल वोट मांगने का अभियान नहीं रहा, बल्कि सामाजिक एकता का उत्सव बन गया है।
जोकीहाट सीट से जन सुराज के प्रत्याशी सरफराज आलम, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री तस्लीमुद्दीन के पुत्र हैं, ने नामांकन के बाद मां खड़गेश्वरी काली मंदिर जाकर आशीर्वाद लिया और वहीं से प्रचार की शुरुआत की। वहीं अररिया जदयू प्रत्याशी शगुफ्ता अजीम ने काली पूजा पंडालों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होकर लोगों से मुलाकात की।
फारबिसगंज से कांग्रेस प्रत्याशी मनोज विश्वास ने किरकिचिया मदरसा में नमाज अदा करने के बाद समर्थकों से बैठक की, जबकि भाजपा विधायक विद्यासागर केशरी (मंचन केशरी) विभिन्न गांवों में सभी समुदायों से संपर्क साध रहे हैं।
शगुफ्ता अजीम ने कहा, “अररिया की पहचान गंगा-जमुनी तहजीब की धरती रही है। यहां राम बिना रमजान अधूरा और अली बिना दिवाली अधूरी रहती है।”
सीमांचल के चुनाव प्रचार में फिलहाल जाति और धर्म की सीमाएं टूटती दिख रही हैं, और प्रत्याशी एकता, भाईचारे व सद्भाव का संदेश दे रहे हैं।

