Araia News:- लोक आस्था और सूर्योपासना का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ शनिवार से आरंभ हो गया है। इस पावन दिन पर व्रती सात्विक भोजन कर अपनी शारीरिक और मानसिक शुद्धि का संकल्प लेते हैं। परंपरा के अनुसार नहाय खाय के दिन व्रती अरवा चावल, चने की दाल और लौकी की सब्जी का सेवन करते हैं। इसी कारण शनिवार को पूरे जिले में लौकी की जबरदस्त मांग देखी गई।
बाजारों में सुबह से ही खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। लौकी की कीमत 80 से 125 रुपये प्रति पीस तक पहुंच गई। कई जगहों पर दुकानदारों ने लौकी को काटकर किलो के हिसाब से भी बेचा। बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद श्रद्धालुओं ने बिना मोलभाव के लौकी खरीदी।
फैंसी मार्केट में सब्जी बेचने वाली रेशमा देवी ने बताया कि मंडी से ही इस बार लौकी की कीमत काफी बढ़ी हुई थी। उन्होंने कहा, “हम लोग केवल थोड़ा सा मुनाफा लेकर बेच रहे हैं। अन्य दिनों में यही लौकी 30 से 50 रुपये में बिकती है, लेकिन छठ के कारण मांग अचानक बढ़ गई।”
वहीं खरीदार रमेश राम ने कहा कि छठ लोक आस्था का पर्व है और इसकी शुरुआत नहाय खाय से होती है। ऐसे में कीमत चाहे जितनी हो, लौकी खरीदना तो जरूरी है। यह सात्विक भोजन का अहम हिस्सा है, जो व्रती को छठ के शुद्ध आचरण के लिए तैयार करता है।
नहाय खाय के दिन व्रती स्नान कर सेंधा नमक, देसी घी और शुद्ध देसी सामग्रियों से भोजन तैयार करते हैं। भोजन के बाद वे आगामी दिनों के लिए व्रत और उपासना का संकल्प लेते हैं।
छठ पर्व के प्रति श्रद्धा और उत्साह के बीच महंगाई का असर भी फीका पड़ गया है। बाजारों में न केवल लौकी, बल्कि चने की दाल, अरवा चावल और मिट्टी के बर्तनों की बिक्री में भी तेज़ी देखी जा रही है।

