East Chamaparan News:- नेपाल में पिछले तीन दिनों से जारी हिंसा और आंदोलन ने हालात बिगाड़ दिए हैं। इसका असर अब भारत-नेपाल सीमा पर साफ दिख रहा है। बड़ी संख्या में वहां काम कर रहे भारतीय नागरिक अपने घरों को लौट रहे हैं। बुधवार सुबह से ही रक्सौल बॉर्डर पर लोगों की भीड़ देखने को मिली। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मोतिहारी एसपी स्वर्ण प्रभात ने देर रात सीमा क्षेत्रों का दौरा कर सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की। एसएसबी के जवानों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने का निर्देश दिया गया है। सीमा पर आने-जाने वाले नागरिकों की सघन जांच की जा रही है। मैत्री पुल पर डॉग स्क्वॉड की मदद से भी यात्रियों के सामानों की जांच हो रही है।
नेपाल से लौट रहे मजदूरों का कहना है कि वहां की स्थिति भयावह हो चुकी है। जीतपुर से लौटे मजदूर हरिनारायण महतो ने बताया कि फैक्ट्रियों और कल-कारखानों का काम पूरी तरह ठप हो गया है। तीन दिनों से काम बंद है और यह स्पष्ट नहीं है कि काम कब शुरू होगा। इसी कारण वे सुरक्षित घर लौटने को मजबूर हो गए हैं। कई लोग तो 15 किलोमीटर पैदल चलकर रक्सौल रेलवे स्टेशन की ओर निकल पड़े क्योंकि नेपाल में यातायात पूरी तरह बंद है।
जानकारी के अनुसार, सुबह 10 बजे के बाद से नेपाल और भारत के बीच लोगों की आवाजाही रोक दी गई है। ऊपरी आदेश के तहत नेपाल से आने वाले नागरिकों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा रही है। बताया जा रहा है कि नेपाल की कई जेलों से कैदी फरार हो चुके हैं और आंदोलनकारियों ने हथियार भी लूट लिए हैं। इस खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने सुरक्षा और अधिक कड़ी कर दी है ताकि फरार अपराधी सीमा पार कर भारत न घुस सकें।
खुफिया विभाग का कहना है कि भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी से नाराज जनता के विद्रोह की आड़ में ड्रग्स पैडलर और अपराधी भी सक्रिय हो गए हैं। हालांकि नेपाल में सेना की तैनाती और भारत-नेपाल सीमा पर कड़ी चौकसी से उनके मंसूबे नाकाम साबित होंगे।

