Gopalganj News:- बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए गठबंधन के टिकट बंटवारे के बाद गोपालगंज और बैकुंठपुर सीटों पर बगावत के सुर तेज हो गए हैं। भाजपा और जदयू दोनों दलों के नेताओं में जबरदस्त असंतोष देखा जा रहा है। कई दावेदारों ने पार्टी नेतृत्व पर कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है।
गोपालगंज विधानसभा सीट पर टिकट को लेकर सबसे ज्यादा खींचतान देखने को मिली। यहां भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अनुप कुमार श्रीवास्तव, डॉ. विशाल गुप्ता और जिला परिषद अध्यक्ष सुभाष सिंह जैसे प्रभावशाली नेताओं ने टिकट के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं ने पटना से लेकर दिल्ली तक लॉबिंग की, लेकिन जब पार्टी ने उम्मीदवार तय किया, तो कई दावेदारों में नाराजगी खुलकर सामने आ गई।
भाजपा नेता अनुप श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया पर चुनाव लड़ने के संकेत देते हुए कहा कि वे जनता के बीच अपनी बात रखेंगे।
वहीं बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र में भी एनडीए के भीतर दरारें गहराती दिख रही हैं। भाजपा ने इस बार मिथिलेश तिवारी को प्रत्याशी बनाया है, जबकि जदयू के वरिष्ठ नेता मंजीत कुमार सिंह ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है।
वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में बैकुंठपुर सीट से राजद के प्रेमशंकर प्रसाद यादव ने 67,807 मतों से जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा प्रत्याशी मिथिलेश तिवारी को 56,694 वोट मिले थे। जदयू से नाराज मंजीत सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 43,354 वोट हासिल किए थे, जिससे एनडीए को नुकसान उठाना पड़ा था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस बार भी मंजीत सिंह मैदान में उतरते हैं, तो एनडीए का समीकरण बिगड़ सकता है और विपक्ष को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
सूत्रों का कहना है कि एनडीए नेतृत्व ने इन मतभेदों को “आंतरिक असहमति” बताते हुए जल्द समाधान का भरोसा दिलाया है, लेकिन बगावत की सुगबुगाहट लगातार बढ़ रही है।
जैसे-जैसे नामांकन प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, एनडीए के लिए अब चुनौती सिर्फ विपक्ष से नहीं, बल्कि अपनों के असंतोष से भी है। गोपालगंज और बैकुंठपुर में बगावत का यह माहौल आने वाले दिनों में राजनीतिक समीकरण को नया मोड़ दे सकता है।

