Chatra News: जिला मुख्यालय स्थित बस स्टैंड के समीप संचालित मेदांता हॉस्पिटल में इलाज के दौरान गर्भवती महिला और उसके अजन्मे बच्चे की मौत के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया है। यह कार्रवाई उपायुक्त रवि आनंद के निर्देश पर गठित जांच टीम द्वारा रविवार देर शाम की गई।
जानकारी के अनुसार लावालौंग प्रखंड निवासी बैजंती देवी को उपचार के लिए मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल जांच के आदेश दिए।
जांच के लिए प्रभारी सिविल सर्जन सह सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. पंकज कुमार, अंचलाधिकारी अनिल कुमार तथा सदर थाना प्रभारी अवधेश कुमार सिंह के नेतृत्व में एक टीम अस्पताल पहुंची। टीम ने अस्पताल के विभिन्न विभागों और व्यवस्थाओं की गहन जांच की। जांच के दौरान अस्पताल के चिकित्सक और अधिकांश कर्मचारी अनुपस्थित पाए गए। प्रशासनिक अधिकारियों के पहुंचने की सूचना मिलते ही अस्पताल कर्मियों के फरार होने की बात सामने आई।
जांच के समय अस्पताल में केवल एक मरीज, सिमरिया प्रखंड के कसारी निवासी राहुल भुईंया भर्ती मिला। प्रशासन ने मरीज की सुरक्षा और बेहतर उपचार सुनिश्चित करते हुए उसे एंबुलेंस के माध्यम से सदर अस्पताल भेज दिया।प्रारंभिक जांच में कई अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाया। टीम ने अस्पताल के वार्ड, ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर और मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगाकर पूरे अस्पताल परिसर को सील कर दिया। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अस्पताल प्रबंधन को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में गर्भवती महिला के इलाज में लापरवाही के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर अस्पताल को तत्काल प्रभाव से सील किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की इस कार्रवाई को स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वहीं मृतका के परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद जता रहे हैं।


