Patna News:- बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है—क्या भारत सचमुच ‘कांग्रेस-मुक्त राजनीति’ की ओर बढ़ रहा है? यह वही राजनीतिक नारा है जिसे भाजपा वर्षों से दोहराती रही है, और आज के चुनावी संकेत इसे वास्तविकता के करीब दिखा रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता आनन्द दूबे के अनुसार, भारत का राजनीतिक परिदृश्य जिस तेजी से बदल रहा है, उसने वैश्विक राजनीति के विशेषज्ञों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है। विश्व के बड़े थिंक-टैंक भारत में कांग्रेस के सिकुड़ने और भाजपा के व्यापक उभार को ‘राजनीतिक शक्ति परिवर्तन के मॉडल’ के रूप में विश्लेषित कर रहे हैं। उनका कहना है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में यह बदलाव एक बड़ा अध्ययन विषय बन गया है।
राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर जगमीत बावा का मानना है कि यह सिर्फ चुनावी नतीजों का प्रश्न नहीं, बल्कि 100 साल पुराने दल के क्षरण और एक वैचारिक रूप से सुदृढ़ राजनीतिक शक्ति के उदय का ऐतिहासिक क्षण है।
क्षेत्रीय दलों के लिए बोझ बना कांग्रेस का साथ
विश्लेषकों का तर्क है कि पिछले एक दशक में कांग्रेस किसी भी गठबंधन को मजबूत नहीं कर पाई। कई राज्यों में कांग्रेस का साथ लेने से क्षेत्रीय दलों को अपने पारंपरिक वोटबैंक में नुकसान झेलना पड़ा। बिहार चुनाव 2025 इसका ताजा उदाहरण बना, जहां महागठबंधन की सबसे कमजोर कड़ी कांग्रेस साबित हुई और उसके खराब प्रदर्शन ने पूरे गठबंधन पर असर डाला।
भाजपा के बढ़ते प्रभुत्व के बीच कांग्रेस का क्षरण
वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्र कहते हैं कि भाजपा अब एक पार्टी भर नहीं रही, बल्कि एक राष्ट्रीय राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित हो चुकी है। भाजपा का नेतृत्व, संगठन क्षमता, तकनीकी दक्षता और जमीनी कैडर कांग्रेस से कहीं आगे है। दूसरी ओर कांग्रेस न नेतृत्व दे पा रही है, न स्पष्ट रणनीति और न ही जन-आकर्षण बनाए रख पा रही है।
मिश्र के अनुसार, भाजपा का राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और विकास आधारित मॉडल न केवल पारंपरिक कांग्रेस वोटरों को अपनी ओर खींच रहा है, बल्कि युवा मतदाताओं का स्थायी भरोसा भी जीत रहा है।
देश की राजनीति कांग्रेस-मुक्त दिशा में आगे बढ़ती दिख रही
चुनावी आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस सिर्फ कमजोर नहीं हो रही, बल्कि कई राज्यों में लगभग अप्रासंगिक स्थिति में पहुंच गई है। उसका संगठनात्मक ढांचा बिखर चुका है, युवा नेतृत्व का अभाव है और पुराने नेताओं की पकड़ लगातार कमजोर हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि 2025 के बाद कांग्रेस क्षेत्रीय स्तर की पार्टी के रूप में सिमटने की ओर बढ़ रही है।
वैश्विक स्तर पर उभर रहा भाजपा मॉडल
विशेषज्ञ बताते हैं कि जनसंख्या और लोकतांत्रिक संरचना के नजरिए से भारत की राजनीति अब दुनिया के लिए एक अध्ययन का मॉडल बन चुकी है। भाजपा का मजबूत संगठन, नेतृत्व का केंद्रीकरण, वैचारिक स्पष्टता और सोशल मीडिया से लेकर बूथ स्तर तक की सक्रियता इसे एक नया ‘पॉलिटिकल फ्रेमवर्क’ बना रही है।
भाजपा का यह मॉडल अब एशिया और अफ्रीका के कई देशों की राजनीतिक प्रणाली पर प्रभाव डालने की क्षमता रखता है।
कांग्रेस के पास न नेतृत्व, न रणनीति, न जन-आकर्षण
प्रोफेसर जगमीत बावा का कहना है कि कांग्रेस के पास तीन बुनियादी स्तंभों—नेतृत्व, रणनीति और जन-आकर्षण—की स्पष्ट कमी है। जिस पार्टी ने भारत को आजादी दिलाई, वही आज 10 करोड़ से अधिक वोटरों का आधार खो चुकी है। यह दुनिया के लिए भी चौंकाने वाला राजनीतिक परिवर्तन है।
बावा के अनुसार, विपक्ष में कांग्रेस अब ‘एसेट’ नहीं, बल्कि ‘लायबिलिटी’ के रूप में देखी जा रही है—यह भारत की राजनीति के लिए भी बड़ा संकेत है।
‘न्यू इंडिया मॉडल’ पर दुनिया की नजर
विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि भारत वैश्विक मंचों पर तेजी से उभर रहा है। ऐसे समय में कांग्रेस का पतन और भाजपा का उभार विश्व राजनीति को यह संकेत दे रहा है कि भारत एक स्थायी, वैचारिक और नेतृत्व-केंद्रित राजनीतिक मॉडल की ओर बढ़ रहा है। यह मॉडल भविष्य में कई लोकतांत्रिक देशों के लिए दिशा तय कर सकता है।

