Araia News:- फारबिसगंज अनुमंडल के कौआचार स्थित कविलासा गांव में परमान नदी पर बना लगभग 3.82 करोड़ रुपये लागत का पुल धंसने से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। यह पुल भाजपा सांसद प्रदीप कुमार सिंह के गांव में बना था और इसे एनडीए की बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया गया था। अब इसके क्षतिग्रस्त होने पर विपक्ष ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए एनडीए नेताओं को घेरना शुरू कर दिया है।
ग्रामीण कार्य विभाग ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। यह टीम तीन दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपेगी। जांच दल में विभाग के अभियंता, राज्य गुणवत्ता समन्वयक, तकनीकी विशेषज्ञ, पुल सलाहकार और आईआईटी पटना के प्रोफेसर वैभव सिंघल शामिल हैं।
पुल की लंबाई 129.02 मीटर है। इसकी स्वीकृत राशि 4 करोड़ 12 लाख रुपये तय की गई थी, लेकिन टेंडर प्रक्रिया में कोसी कंस्ट्रक्शन ने 3 करोड़ 82 लाख 85 हजार रुपये में निर्माण का कार्य लिया। निर्माण कार्य मार्च 2021 में पूरा हुआ था। यह पुल सिकटी, नरपतगंज, फारबिसगंज और जोगबनी के बीच आवागमन का प्रमुख मार्ग बन गया था।
तकनीकी सलाहकार रमेश कुमार ने 24 अक्टूबर 2025 को निरीक्षण के दौरान पाया कि पुल का पाया धीरे-धीरे नीचे धंस रहा है। इसके बाद पुल पर तत्काल आवागमन रोकने की सिफारिश की गई। विभाग ने निर्माण एजेंसी से स्पष्टीकरण मांगा है, क्योंकि पुल अभी डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड में है।
गौरतलब है कि इससे पहले सिकटी में 12 करोड़ की लागत से बना पुल उद्घाटन से पहले ध्वस्त हो गया था। वहीं रानीगंज में बिना सड़क के बीच खेत में पुल निर्माण भी चर्चा का विषय रहा। पुलों के लगातार धंसने व गिरने से विभाग की कार्यशैली व निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
